Tips for REET Exam रीट परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स एवं महत्वपूर्ण जानकारी

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Tips for REET Exam

46500 पदों पर होने वाली रीट परीक्षा का आयोजन माध्यमिक शिक्षा बॉर्ड द्वारा 23 तथा 24 जुलाई 2022 को आयोजित की जा रही है। इस परीक्षा के लिए ऐड्मिट कार्ड 15 जुलाई 2022 तक जारी की जाने की संभावना है। इस पोस्ट में रीट 2022 के लिए इतने कम समय में कैसे पढ़ें और कौन कौनसे विषय को किस प्रकार पढ़ें इन सभी विषयों के बारे में विस्तार से बताया है। यदि आप रीट 2022 की तैयारी कर रहे है तो यह पोस्ट आपके लिए बेहद ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। Tips for REET Exam

Tips for REET Exam
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REET 2022 Exam Pattern

रीट परीक्षा का आयोजन दो लेवल पर किया जाता है लेवल प्रथम कक्षा 1 से 5 तक के लिए तथा लेवल द्वितीय कक्षा 6 से 8 तक के लिए होता है। लेवल द्वितीय की परीक्षा में बाल विकास, भाषा प्रथम तथा भाषा द्वितीय इन तीन विषयों के पेपर कॉमन होते है तथा सब्जेक्ट के पेपर अलग अलग होते है। इस परीक्षा में बाल विकास के 30 प्रश्न, भाषा प्रथम के 30 प्रश्न व भाषा द्वितीय के 30 प्रश्न, तथा सब्जेक्ट के 90 प्रश्न पूछे जाते है। इस प्रकार परीक्षा में कुल 150 अंक के 150 प्रश्न होंगे।

TopicQuestionMarksTime
बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र303030 min
सामाजिक अध्ययन / विज्ञान & गणित 606060 min
भाषा – 1303030 min
भाषा – 2303030 min
Total150 Question150 Marks150 min

REET परीक्षा के अंतिम दिनों की रणनीति

  • रीट परीक्षा के लिए अब कोई नई बुक न खरीदें। 
  • पुराने पढे हुए मैटर को ज्यादा से ज्यादा रिवाइज करें। 
  • दिन में कम से कम एक मॉडल पेपर OMR शीट पर हल करें। 
  • पिछले वर्षों में आए हुए प्रश्नों को सॉल्व करें। 
  • यूट्यूब या ऑनलाइन पर ज्यादा समय न बिताकर बुक्स पर ज्यादा फोकस करें। 
  • अब नए नोट्स बनाने की बजाय केवल पुराने पढे हुए नोट्स का ही रिवीजन करें। 
  • सेहत का ध्यान रखें और समय पर खाना खाएं, दिन में अधिक से अधिक पानी पीते रहें ताकि आप डिहाइड्रेट न हो। 
  • लगातार न पढ़ें, 1 घंटे पढ़ने के बाद 5 – 7 मिनट का अंतराल लेवे और इस समय मोबाईल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें। 
  • ओवर कॉन्फिडेंस में मत रहिए की मेरे तो पिछली रीट परीक्षा में भी अच्छे अंक आ गए थे इस बार तो केवल सर्टिफिकेट लेना है वो तो आ ही जाएगा। 

Tips for REET Exam नया पढ़ने की बजाय रिविज़न करें

ज्यादातर अभ्यर्थी कम समय को देखते हुए अधिक से अधिक बुक्स पढ़ने की कोशिश करते हैं। ऐसा करना बिल्कुल गलत तरीका है। कम समय में ज्यादा पढ़ने के चक्कर में छात्र जो पहले पढ़ चुका होता है उसे भी भूल जाने की संभावना बन जाती है। यह बात सब जानते हैं कि सिर्फ पढ़ते रहने से ज्यादा वक्त तक याद नहीं रहता। इसलिए अधिक पढ़ने की बजाय अपना रिविज़न अच्छे से पूर्ण करें। परीक्षा से पहले उन सभी टॉपिक को कवर कर लें, जिसका अध्ययन आप अभी तक करते आए हैं। और एक बार उन सभी टॉपिक का रिवीजन जरूर करें जो आपने अब तक पढ़ें है। तथा स्कोरिंग टॉपिक्स पर ध्यान दें और सबसे ज्यादा उनका अध्ययन करें। इससे आपकी तैयारी और अच्छी होगी।

टेस्ट सीरीज / मॉडल पेपर से अभ्यास करें

परीक्षा से पूर्व टेस्ट सीरीज या मॉडल पेपर से अभ्यास करना, तैयारी को मजबूत कर देता है। इसके अभ्यास से हमारा दोहराव भी हो जाता है। प्रश्न-पत्र के समरूप टेस्ट सीरीज के अभ्यास से वास्तविक परीक्षा का प्रायोगिक ज्ञान तो होता ही है, साथ ही महत्वपूर्ण प्रश्नों को याद करते हुए उनके आधार को भी समझा जा सकता है। विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई टेस्ट सीरीज या मॉडल पेपर से ही अभ्यास करना चाहिए। यदि मॉडल पेपर या टेस्ट सीरीज परीक्षा स्तर को ध्यान में रख कर बनाई गई होती है। तो इससे मुख्य परीक्षा के अनुरूप तैयारी करने के साथ जरुरी टॉपिक का अध्ययन भी हो जाता है। तथा अब अनसोल्व्ड पेपर से अभ्यास शुरू कर देना चाहिए। इससे पूर्ण पाठ्यक्रम का रिविज़न तो होता ही है साथ ही Confidence भी बढ़ता है।

आप किसी भी कोचिंग सेंटर या ऑनलाइन पर टेस्ट दे सकते हैं। तो आप अपनी तैयारी का आकलन कर सकते हैं और निर्धारित कर सकते हैं कि आपने किस स्तर को प्राप्त किया है। इन परीक्षाओं को ईमानदारी से बार-बार दोहराने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। नतीजतन, आप अधिक मेहनत कर पाएंगे और आपका दिमाग कम तनावग्रस्त रहेगा।

समय प्रबंधन का ध्यान रखें 

चाहे कोई परीक्षा हो या कोई अन्य काम, समय का अपना महत्व होता है। सही समय पर सही तरह से कार्य नहीं किया जाए तो फिर उस कार्य के सही परिणाम की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। इसलिए विषय और टॉपिक्स की महत्ता को देखते हुए अपने समय का प्रबंधन करें। और टॉपिक के अनुसार उसे समय दें। प्रश्नपत्र में उन सवालों को बाद में करें जिन्हे हल करने में आपको अधिक समय लग रहा हो। पहले उन सवालों को हल करें जिनके उत्तर आप कम समय में दे सकते हैं। अगर आप पहली बार रीट की परीक्षा दे रहें हैं तो इस अभ्यास को अपने व्यवहार में जरूर लाए।    

सामाजिक अध्ययन विषय Tips for REET Exam

सामाजिक अध्ययन विषय वाले अभ्यर्थियों के लिए इस परीक्षा में 60 प्रश्न सब्जेक्ट से संबंधित आएंगे। SST में मेन पार्ट 3 सब्जेक्ट (पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री और ज्योग्राफी) हैं। जिनमें सबसे ज्यादा वेटेज इतिहास का है। रीट लेवल-2 में 25 से ज्यादा प्रश्न इतिहास से रहेंगे। इसके लिए तीनों एनशिएंट हिस्ट्री, मिडिवल हिस्ट्री और मॉडर्न हिस्ट्री पढ़ना जरूरी है। ज्योग्राफी में 3 यूनिट्स हैं। पृथ्वी व हमारा पर्यावरण, रीजनल ज्योग्राफी में भारत का भूगोल और राजस्थान का भूगोल शामिल है। पुराने रीट एग्जाम में 20 प्रश्न ज्योग्राफी से आते थे, लेकिन पिछली बार 15 ही प्रश्न आए। पॉलिटिकल साइंस के 2 पार्ट हैं। इनमें संविधान, सरकार का गठन और संरचना महत्वपूर्ण है। संसद, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, उनके कार्य और स्थानीय स्वशासन संबंधी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। पॉलिटी में भी 15 से 20 प्रश्न पूछे जाएंगे।

विज्ञान विषय

लेवल द्वितीय में विज्ञान विषय के 30 प्रश्न पूछे जाएंगे। जिनमें से लगभग 20 से 22 क्वेश्चन सब्जेक्ट और 8 से 10 क्वेश्चन टीचिंग मैथड के होते हैं। विज्ञान विषय में सब्जेक्ट के 22 में से 11 प्रश्न बायोलॉजी, 6 फिजिक्स और बाकी 5 प्रश्न केमिस्ट्री के होते हैं। सबसे ज्यादा फोकस बायोलॉजी में ह्यूमन स्ट्रक्चर- कोशिका, पाचन तंत्र, श्वसन पर करें क्योंकि इन टॉपिक से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते है। 

गणित विषय

गणित विषय के बहुत ज्यादा कठिन प्रश्न नहीं आते हैं। गणित विषय में जो टॉपिक पढ़ चुके हैं, उनका रिवीजन करें और ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन टेस्ट पेपर या मॉडल पेपर हल करते रहें। इससे आपकी तैयारी का आकलन हो जाता है। पास होने के लिए सभी सब्जेक्ट को बराबर टाइम देना है। लेवल-2 में आयतन, क्षेत्रफल, बीजगणित की पढ़ाई ज्यादा करनी चाहिए। ये स्कोरिंग सब्जेक्ट हैं। इसलिए इनकी अच्छे से तैयारी करें। 

बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र Tips for REET Exam

बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र में जो टॉपिक्स पहले से आते हैं, उनको ज्यादा पढ़ने की आदत छोड़ें। 3 स्टार मार्किंग करें। पहला- बहुत अच्छे से याद टॉपिक, दूसरा-कुछ कम याद, तीसरा जो बिल्कुल समझ से बाहर हैं। इस आधार पर प्रायोरिटी सेट कर पढ़ाई करें। इस विषय में बाल विकास के सिद्धांत, वंशानुक्रम और वातावरण पढ़ना है। इसमें शिक्षण अधिगम प्रोसेस, ब्लूम टेक्सोनोमी, एनसीएफ 2005, आरटीई-2009, मापन मूल्यांकन,असेसमेंट, सतत और व्यापक मूल्यांकन, क्रियात्मक अनुसंधान से प्रश्न आते हैं। मापन में प्रोजेक्शन मेथड इंपॉर्टेंट है। अंत: स्रावी ग्रंथियां, वंशानुक्रम वातावरण की भूमिका, सिगमंड फ्रायड, नव फ्रायडवाद, अंत:दृष्टि का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही लर्निंग डिफिकल्टीज पढ़ लें। और साथ में पुराने पेपर सॉल्व करें। 

हिन्दी भाषा-शिक्षण विधियों पर विशेष ध्यान दें 

हिन्दी विषय की तैयारी करने का सबसे अच्छा तरीका है पिछले वर्षों में आए हुए प्रश्न पत्रों का एनालिसिस करके अध्ययन करना। इससे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति और लेवल का पता चलता है कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते है। अब इतने काम समय में नई बुक्स के चक्कर में न पड़कर केवल रिवीजन पर ध्यान दें। हिंदी भाषा में 15 अंक की व्याकरण और 15 अंक की शिक्षण विधियों के प्रश्न आएंगे। हिन्दी और संस्कृत भाषा में शिक्षण विधियाँ काफी हद तक समान होती है।

English Language

अंग्रेजी भाषा के 30 प्रश्न पूछे जाएंगे जिनमें से टीचिंग मैथड्स में से 10 से 12 प्रश्न पूछे जाएंगे। अब परीक्षा के लिए इतना समय नहीं बचा है इसलिए अभ्यर्थी इस बचे हुए समय में शिक्षण विधियों पर फोकस करें और शिक्षण विधियों को अधिक पढ़ें। क्योंकि इनमें से 10 से 12 प्रश पूछे जाएंगे। इसके अलावा अंग्रेजी विषय के Phonetics, Vocabulary जैसे टॉपिक है जिनमें से अच्छे प्रश्न पूछे जाते है ऐसे टॉपिक का भी रिवीजन अवश्य करें। और इस समय बुक से ज्यादा तैयारी करें टेस्ट सीरीज या मॉडल पेपर हल करके अभ्यास करें। 

संस्कृत भाषा

रीट परीक्षा में संस्कृत भाषा के 30 प्रश्न पूछे जाएंगे जिसमें से 15 प्रश्न संस्कृत व्याकरण के तथा 15 प्रश्न संस्कृत शिक्षण विधियों के होंगे। संस्कृत व्याकरण में वर्ण विचार, छंद, समय ज्ञान, संख्या ज्ञान, वर्ण विचार आदि टॉपिक पर विशेष ध्यान दें क्योंकि इन टॉपिक से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते है। तथा संस्कृत एक ऐसा विषय है जिसमें 30 में 30 अंक प्राप्त किए जा सकते है। रीट परीक्षा के लिए समय बहुत कम है इसलिए जो कुछ भी पढ़ा है उसका रिवीजन करें और इन अच्छे स्कोर वाले टॉपिक पर विशेष ध्यान दें। तथा शिक्षण विधियों का नियमित अध्ययन करें। 

परीक्षा के एक दिन पूर्व अपना अध्ययन समाप्त कर दे, परीक्षा के ठीक पहले  कुछ न पढ़ें या रिवीजन न करें । ऐसा करने से आप तनाव ग्रस्त हो सकते हैं। आप डिप्रेशन या फ़ार्गेटफूल (सब कुछ भूल जाना) के शिकार हो सकते हैं। आप ऐसा करते है, तो आपका आत्मविश्वास कम हो जाता है। आप परीक्षा देते समय घबरा जाते हैं, और हड़बड़ाहट में आपको जो याद है, वो भी भूल जाएंगे। 

परीक्षा से पूर्व पूरी नींद लें एवं हल्का पोष्टिक खाना खायें। आप परीक्षा जितना सामान्य होकर देंगे आपकी परीक्षा उतनी ही अच्छी रहेगी। इसलिए आपको परीक्षा से पूर्व दिमाग पर तनाव नही लेना चाहिए।

उपर्युक्त बातों का ध्यान रखते हुए तनाव मुक्त हो कर तैयारी करें। कभी भी दिमाग में चिंता और नकारात्मक विचार ले कर पढ़ने न बैठें। परीक्षा के दिनों में अपनी सेहत का ख्याल भी जरूर रखें। परीक्षा का दबाव महसूस करने की बजाय हमेशा अपनी तैयारी को ले कर अपने आत्मविश्वास को अडिग रखें।

मुझे विश्वास है, आपको हमारे द्वारा बताए गए सुझाव पसंद आये होंगे। हम आपके सुनहरे भविष्य की कामना करते हैं।

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