Sant Dadu Dayal Ji, संत दादूदयाल जी, दादू दयाल के शिष्य, संत रज़्जब जी, सुन्दरदास जी
Dadu Dayal Ji संत दादूदयाल
◆ जन्म – अहमदाबाद में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को 1544 ई. में
◆ उपनाम – राजस्थान का कबीर
◆ मुख्य पीठ – नरायणा (जयपुर)
◆ शाखाएं – पाँच (खालसा, विरक्त, उतरादे, खाकी, नागा)
◆ 1585 ई. में मुगल सम्राट अकबर से फतेहपुर सीकरी में मुलाकात की।
◆ दादू जी के 152 प्रधान शिष्य थे, जिनमें से 100 शिष्य एकांतवासी थे व 52 शिष्यों ने स्थान-स्थान पर दादूद्वारों की स्थापना की।
◆ दादूदयाल के 52 शिष्यों को बावन स्तम्भ कहा जाता है।
◆ दादू पंथ के मंदिरों को दादूद्वारा कहा जाता है।
◆ दादू पंथ के मंदिरों में कोई मूर्ति नहीं होती है, वाणी (ग्रंथ) रखी जाती है।
◆ दादू पंथी शव का वायु दहन करते है। (पशु – पक्षियों के खाने के लिए छोड़ दिया जाता है।)
◆ दादूदयाल का 1603 ई. में देहांत हो गया। इनके शव को भेराणा की पहाड़ी में छोड़ दिया गया। इस स्थान को दादू खोल या दादूपालका कहा जाता है।
◆ दादूपंथियों के सत्संग स्थल को ‘अलख दरीबा’ कहा जाता है।
◆ दादू दयाल ने निर्गुण भक्ति का संदेश दिया था।
◆ दादू दयाल ने अपने उपदेश सरल मिश्र हिन्दी (सधुक्कड़ी) / ढुँढाड़ी भाषा में दिए।
दादू दयाल के शिष्य
👉 दादू दयाल के प्रमुख शिष्यों में गरीबदास, मिसकीनदास, सुन्दरदास, बखनाजी, रज़्जबजी, माधोदास आदि है।
संत रज़्जब जी
◆ इनका जन्म सोलहवीं शताब्दी में सांगानेर (जयपुर) में एक पठान परिवार में हुआ।
◆ ये दादू जी के प्रमुख शिष्य थे।
◆ इन्होंने शादी के लिए जाते समय दादू जी के उपदेश सुनकर शादी नहीं की एवं आजीवन दूल्हे के वेश में रहे।
◆ इनके प्रमुख ग्रंथ – रज़्जबवाणी, सर्वंगी
◆ इनकी प्रधान गद्दी सांगानेर (जयपुर) में है।
◆ रज़्जबजी के शिष्य रज़्जबपंथी कहलाते है।
सुन्दरदास जी
◆ सुन्दरदास का जन्म 1596 ई. में दौसा में हुआ।
◆ इन्होंने 42 ग्रंथों की रचना की थी।
◆ प्रमुख ग्रंथ – सुन्दर विलास
◆ इन्होंने नागा शाखा की स्थापना की।
◆ नागा साधुओं ने मराठा आक्रमण के समय जयपुर के राजा प्रताप सिंह की मदद की थी।
◆ नागा साधुओं के रहने के स्थान को छावनी कहा जाता है।
◆ सुन्दरदास जी की समाधि “गेटोलाव (दौसा)” में बनी हुई है।
◆ इनका देहांत 1707 ई. में सांगानेर में हुआ।
FAQ / सामान्य प्रश्न
संत दादू दयाल के गुरु कौन थे ?
संत ब्रह्मानन्द दादू दयाल के गुरु थे।
संत दादू दयाल के पुत्रों के नाम बताइए ?
संत दादू दयाल के पहले पुत्र का नाम गरीबदास था जिनका जन्म 1575 ई. में सांभर में हुआ था। बाद में इनके एक पुत्र मिस्किनदास एवं दो पुत्रियाँ शोभाकुँवरी, व रूपकुँवरी का जन्म हुआ।
संत दादू दयाल ने किसका विरोध किया था ?
संत दादू दयाल ने कर्मकांड, जातिप्रथा, मूर्तिपूजा, रूढ़िवादिता आदि का विरोध किया था।
दादू पंथ का आरंभ कहाँ से माना जाता है?
इन्होंने सर्वप्रथम सांभर में जनसाधारण को उपदेश दिए थे इसलिए सांभर से ही दादू पंथ का आरंभ माना जाता है।
दादू पंथ के दार्शनिक सिद्धांतों को साहित्यिक रचनाओ में पद्दबद्ध किसने किया था?
सुन्दरदास ने दादू पंथ के दार्शनिक सिद्धांतों को साहित्यिक रचनाओ में पद्दबद्ध करने का कार्य किया था।
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