राजस्थान में ऊर्जा संसाधन | Rajasthan me Urja Sansadhan | Energy Resources

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राजस्थान में ऊर्जा संसाधन | Rajasthan me Urja Sansadhan –

राजस्थान में ऊर्जा संसाधन | Rajasthan me Urja Sansadhan | Energy Resources
राजस्थान में ऊर्जा संसाधन | Rajasthan me Urja Sansadhan
Energy Resources in Rajasthan

★ गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधन

1. भूतापीय ऊर्जा :-

● राजस्थान में भूतापीय ऊर्जा की संभावना माउंट आबू (सिरोही) तथा पुष्कर (अजमेर) में है।

2. बायोगैस :-

● पशु अपशिष्ट का उपयोग कर उर्जा उत्पादन बायोगैस कहलाता है।

● बायोगैस के मुख्य घटक मीथेन (65%), कार्बन डाइऑक्साइड (30%)

● राजस्थान में बायोगैस के सर्वाधिक संयंत्र – उदयपुर

● राजस्थान में ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू ऊर्जा का सर्वश्रेष्ठ विकल्प बायोगैस है।

3. बायोमास ऊर्जा :-

● कृषि अवशेष जैसे – चावल की भूसी, सरसों की खल, गेहूं-गन्ना-कपास की डंठल, शहरी कचरा आदि का प्रयोग कर विद्युत ऊर्जा उत्पादन बायोमास ऊर्जा कहलाता है।

● वर्तमान में राजस्थान में लगभग 101 मेगावाट विद्युत ऊर्जा उत्पादन बायोमास होता है जिसका राजस्थान की कुल विद्युत ऊर्जा उत्पादन में 0.56% योगदान है।

★ राजस्थान में बायोमास संयंत्र :-

1. पदमपुरा बायोमास संयंत्र – गंगानगर

● राजस्थान का पहला बायोगैस संयंत्र

● यह कृषि अवशेष पर आधारित है।

2. खेड़ली बायोमास सयंत्र – अलवर

● सरसों की खल पर आधारित सयंत्र है।

3. देवली बायोमास संयंत्र – टोंक

● चावल की भूसी पर आधारित सयंत्र

4. अजमेर बायोमास संयंत्र – अजमेर

● विलायती बबूल आधारित सयंत्र

5. बालोतरा बायोमास संयंत्र – बाड़मेर

● शहरी कचरा आधारित सयंत्र

6. रामगंज बायोमास संयंत्र – कोटा

● शहरी कचरा आधारित सयंत्र

4. पवन ऊर्जा :-

● राजस्थान में गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधनों में सर्वाधिक विद्युत ऊर्जा उत्पादन पवन ऊर्जा से होती है (20.25%)

● पवन ऊर्जा उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का भारत में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात के पश्चात चौथा स्थान है।

● राजस्थान में पवन ऊर्जा की सर्वाधिक संभावना जैसलमेर में है इस कारण जैसलमेर को पंखों की नगरी कहा जाता है।

● राजस्थान में पवन ऊर्जा उत्पादन अक्षय ऊर्जा निगम के अधीन सुजलोन एनर्जी इंडिया, एयरकॉन एनर्जी इंडिया, वोस्टास एनर्जी इंडिया आदि कंपनियां करती है।

★ राजस्थान की पवन ऊर्जा आधारित परियोजना :-

1. अमर सागर विंड पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

● राजस्थान की पहली पवन ऊर्जा परियोजना

● स्थापना – 1998 में RSPCL द्वारा

2. बड़ा बाग विंड पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

3. हंसुआ विण्ड पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

4. सोडा बंधन विंड पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

● निजी क्षेत्र की पहली पवन ऊर्जा परियोजना

5. बिठूड़ी विंड पावर प्रोजेक्ट – फलोदी (जोधपुर)

6. हर्ष पर्वत विंड पावर प्रोजेक्ट – सीकर

7. देवगढ़ विंड पावर प्रोजेक्ट – प्रतापगढ़

8. धमोतर विंड पावर प्रोजेक्ट – प्रतापगढ़

● राजस्थान की सबसे बड़ी पवन ऊर्जा परियोजना

Rajasthan me Urja Sansadhan

5. सौर ऊर्जा :-

● राजस्थान में सौर ऊर्जा का उत्पादन फोटो वॉल्टिक सेल पद्धति (प्रकाश विद्युत प्रभाव) द्वारा किया जाता है।

● प्रकाश विद्युत सेल बनाने में जस्ता (जिंक) का प्रयोग किया जाता है।

● राजस्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन की विपुल संभावनाओं को देखते हुए अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा सीज (SEEZ) की स्थापना की जा रही है।

◆ SEEZ (सीज) – सोलर एनर्जी एंटरप्राइजिंग जॉन

● सीज के अंतर्गत राजस्थान के 3 जिले सम्मिलित हैं – बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर (जिन्हें सौर ऊर्जा त्रिभुज की संज्ञा दी गई है)

● राजस्थान में सर्वाधिक सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावना वाला जिला जोधपुर है (कारण – सूर्य की लंबवत स्थिति, वन प्रतिशत न्यूनतम, पथरीला/चट्टानी मरुस्थल)

◆ वर्तमान में राजस्थान का सौर ऊर्जा उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान है। (4.43%)

★ राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजना :-

1. मथानिया सोलर पावर प्रोजेक्ट – जोधपुर

● राजस्थान की पहली सौर ऊर्जा परियोजना

● जर्मनी, विश्व बैंक, भारत सरकार द्वारा स्थापित

2. गोरीर सोलर पावर प्रोजेक्ट – झुंझुनू

● अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा स्थापित

3. अगोरिया सोलर पावर प्रोजेक्ट – बाड़मेर

● सनसोर्स इण्डिया लिमिटेड – अहमदाबाद द्वारा स्थापित मो

4. मोकला सोलर पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

● एनरॉन एनर्जी लिमिटेड USA द्वारा स्थापित

5. खींवसर सोलर पावर प्रोजेक्ट – नागौर

● रिलायंस द्वारा स्थापित

6. धुनिया सोलर पावर प्रोजेक्ट – जोधपुर

● सोलर पॉवर लिमिटेड मुम्बई द्वारा स्थापित

7. नांदिया सोलर पावर प्रोजेक्ट – जोधपुर

● रिलायंस द्वारा स्थापित

8. भीरूखेड़ा सोलर पावर प्रोजेक्ट – बीकानेर

9. धूड़सर सोलर पावर प्रोजेक्ट – जैसलमेर

● अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा स्थापित

★ राजस्थान में गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधनों से विद्युत ऊर्जा उत्पादन का सही क्रम – पवन ऊर्जा > सौर ऊर्जा > बायोमास ऊर्जा

अक्षय ऊर्जा निगम :-

● राजस्थान में गैर परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के विकास की शीर्ष राज्यस्तरीय संस्था

● अक्षय ऊर्जा निगम की स्थापना REDA (राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण) – 1985, RSPCL (राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) – 1995 को मिलाकर मार्च 2002 में राजस्थान नवीनीकरणीय ऊर्जा विकास निगम के रूप में कई गई। जिसे अगस्त 2002 में अक्षय ऊर्जा निगम नाम दिया गया।

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परम्परागत ऊर्जा संसाधन :-

(1) तापीय ऊर्जा (कोयला आधारित) :-

● राजस्थान में सर्वाधिक विद्युत ऊर्जा उत्पादन कोयला आधारित तापीय ऊर्जा से होता है (56%)

● राजस्थान में अधिकांश तापीय उर्जा परियोजना लिग्नाइट कोयला आधारित है।

● राजस्थान में कोयला आधारित तापीय ऊर्जा परियोजना तीन प्रकार की है –

(A) सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट :-

● वे तापीय परियोजना जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट या अधिक तथा किसी एक इकाई की उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट या अधिक है। सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट कहलाता है।

● राजस्थान के सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट –

(i) सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – गंगानगर (राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट)

● सूरतगढ़ वर्तमान में उत्पादन क्षमता की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी तापीय ऊर्जा परियोजना है।

(ii) छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बांरा (वर्तमान में राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन करने वाली परियोजना)

(iii) कालीसिंध सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – झालावाड़

(iv) झालावाड़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – झालावाड़

(v) बांसवाड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बांसवाड़ा

(B) सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट :-

● वे तापीय ऊर्जा परियोजना जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट या उससे अधिक है जबकि किसी एक इकाई की उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट या उससे अधिक नहीं है।

● राजस्थान के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट :-

(i) कोटा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट – कोटा (1240 MW)

(ii) कवई सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बांरा (1320 MW)

(iii) दानपुर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बांसवाड़ा (1320 MW)

(iv) कपूरड़ी जालीपा सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट – बाड़मेर (1080 MW)

(v) भादरेश सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट – बाड़मेर (1000 MW)

(C) थर्मल पावर प्रोजेक्ट :-

● वे तापीय ऊर्जा परियोजना जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट या उससे अधिक नहीं है तथा किसी इकाई की उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट से अधिक नहीं है। (Rajasthan me Urja Sansadhan)

● राजस्थान के थर्मल पावर प्रोजेक्ट :-

(i) हाड़ला थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बीकानेर

(ii) गुढ़ा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट – बीकानेर

(iii) गिरल थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बाड़मेर

(iv) नेवली थर्मल पावर प्रोजेक्ट – बीकानेर

◆ राजस्थान में कोटा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट बिटुमिनस कोयला आधारित परियोजना है।

◆ राजस्थान में पहला निजी क्षेत्र का तापीय ऊर्जा संयंत्र गुढ़ा थर्मल पावर प्रोजेक्ट बीकानेर है।

◆ राजस्थान की पहली गैसीकरण लिग्नाइट तकनीकी पर आधारित परियोजना गिरल थर्मल पावर प्रोजेक्ट बाड़मेर है। (जर्मनी के सहयोग से)

◆ राजस्थान में सुपर क्रिटिकल / सुपर थर्मल / थर्मल पावर प्रोजेक्ट जो निजी क्षेत्र के उपक्रम नहीं है उनका संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) करता है।

★ राजस्थान की संयुक्त तापीय ऊर्जा परियोजना :-

(i) सिंगरौली तापीय ऊर्जा परियोजना – राजस्थान व उत्तर प्रदेश

(ii) रिहंद तापीय ऊर्जा परियोजना – राजस्थान व उत्तर प्रदेश

(iii) ऊंचाहार तापीय ऊर्जा परियोजना – राजस्थान व उत्तर प्रदेश

(iv) ओरिया तापीय उर्जा परियोजना – राजस्थान व उत्तर प्रदेश (v) सतपुड़ा तापीय ऊर्जा परियोजना – राजस्थान व मध्य प्रदेश

(2) प्राकृतिक गैस आधारित तापीय ऊर्जा परियोजना :-

(i) रामगढ़ प्राकृतिक गैस परियोजना – जैसलमेर (राजस्थान की पहली प्राकृतिक गैस आधारित परियोजना)

(ii) केशोरायपाटन प्राकृतिक गैस परियोजना – बूंदी

(iii) कोटा प्राकृतिक गैस परियोजना – बूंदी

(iv) छबड़ा प्राकृतिक गैस परियोजना – बांरा

(v) झामर कोटड़ा प्राकृतिक गैस परियोजना – उदयपुर

(vi) धौलपुर गैस कार्बाइड परियोजना – धौलपुर

नोट – भारत की पहली प्राकृतिक गैस आधारित परियोजना अंता प्राकृतिक गैस परियोजना (बांरा) की स्थापना राजस्थान में कई गयी। परन्तु यह राजस्थान तथा मध्यप्रदेश की सयुक्त प्राकृतिक गैस आधारित परियोजना है।

★ जल विद्युत परियोजना :-

● राजस्थान में जल विद्युत ऊर्जा से 10.12% विद्युत उत्पादन होता है।

● राजस्थान में तीन प्रकार की जल विद्युत परियोजना है

(A) राजस्थान की स्वयं की जल विद्युत परियोजना :-

(i) जाखम परियोजना – जाखम नदी – प्रतापगढ़

(ii) अनास परियोजना – अनास नदी – बांसवाड़ा

(B) राजस्थान की स्वतंत्र साझा परियोजना :-

(i) भाखड़ा नांगल परियोजना –

● सतलज नदी – राजस्थान + पंजाब + हरियाणा

  1. भाखड़ा बांध (हिमाचल प्रदेश) – 17 नवम्बर 1955 – भारत का सबसे ऊंचा गुरुत्वीय बांध (225 मीटर)
  2. नांगल बांध (पंजाब) – 1952 – जल विद्युत परियोजना (राजस्थान का भाग – 15.52%)

(ii) व्यास परियोजना :-

● व्यास नदी – राजस्थान + पंजाब + हरियाणा

  1. पडोह बांध (हिमाचल प्रदेश) – जल विद्युत – (राजस्थान – 20%)
  2. पोंग बांध (हिमाचल प्रदेश) – जल विद्युत – (राजस्थान – 59%)

(iii) चम्बल नदी घाटी परियोजना :-

● चम्बल नदी – राजस्थान : मध्यप्रदेश (50:50)

  1. गांधीसागर बांध – मंदसौर (मध्यप्रदेश) – जल विद्युत
  2. राणाप्रताप सागर बांध – रावतभाटा (चितौड़गढ़) – जल विद्युत
  3. जवाहर सागर बांध – बोरावास (कोटा) – जल विद्युत
  4. कोटा बैराज – कोटा – पेयजल एवं सिंचाई

(iv) माही बजाज सागर परियोजना :-

● माही नदी – राजस्थान : गुजरात (45:55)

  1. कडाना बांध – गुजरात
  2. माही बजाज सागर बांध – बोरखेड़ा (बांसवाड़ा)
  3. कागदी पिकअप बांध – बांसवाड़ा

★ केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाएं :-

  1. सलाल परियोजना – चिनाब नदी – जम्मू कश्मीर
  2. दुल्हस्ती परियोजना – चिनाब नदी – जम्मू कश्मीर
  3. बगलिहर परियोजना – चिनाब नदी – जम्मू कश्मीर
  4. उरी परियोजना – झेलम नदी – जम्मू कश्मीर
  5. तुलबुल परियोजना – झेलम नदी – जम्मू कश्मीर
  6. चमेरा परियोजना – रावी नदी – हिमाचल प्रदेश
  7. नाथपा झाकरी परियोजना – सतलज नदी – हिमाचल प्रदेश
  8. टनकपुर परियोजना — काली नदी – उत्तराखंड
  9. टिहरी परियोजना – भागीरथी नदी – उत्तराखंड

आण्विक ऊर्जा परियोजना :-

1. रावतभाटा परमाणु विद्युत गृह – चितौड़गढ़

● रावतभाटा परमाणु विद्युत ग्रह भारत का सबसे बड़ा परमाणु रिक्टर है जिसमे कुल 8 इकाइयों के संचालन किया जा रहा है।

● रावतभाटा परमाणु रिएक्टर की स्थापना 1965 में कनाडा के सहयोग से की गई।

● रावतभाटा परमाणु रिएक्टर भारत की पहली तथा एकमात्र दाबित भारी जल / गुरु जल / ड्यूटेरियम ऑक्साइड आधारित परियोजना है।

2. बांसवाड़ा परमाणु विद्युत ग्रह :- बांसवाड़ा (निर्माणाधीन)

राजस्थान में विद्युत ऊर्जा उत्पादन का सही क्रम :-

तापीय ऊर्जा > पवन ऊर्जा > जल विद्युत ऊर्जा > सौर ऊर्जा > आण्विक ऊर्जा > बायोमास ऊर्जा

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