राजा राममोहन राय | Raja Ram Mohan Roy

Join WhatsApp GroupJoin Now
Join Telegram GroupJoin Now

राजा राममोहन राय | Raja Ram Mohan Roy: इतिहास की इस पोस्ट में राजा राममोहन राय से संबंधित जानकारी, नोट्स, उनकी प्रमुख रचनाएं, उनके कार्य एवं ब्रह्म समाज से संबंधित जानकारी एवं नोट्स उपलब्ध करवाए गए है जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है, आदि ब्रह्म समाज

राजा राममोहन राय | Raja Ram Mohan Roy

◆ 1772 – 1833
◆ जन्म – 22 मई 1772 – राधानगर – हुगली – प. बंगाल
◆ पिता – कृष्ण कान्त
◆ माता – तारिणी देवी
◆ दादा – दूद नाथ _बंगाल के नवाब ने राय राजा की उपाधि दी)
◆ नौकरी – 1803-14 रंगपुर में
◆ घटनाक्रम – 1811 में भाई जगमोहन की मृत्यु पर उसकी पत्नी सावित्री देवी को जला दिया गया था ।

◆ प्रमुख रचनाएं –
पुस्तकें – (i) ईसा के नीति वचन शांति और खुशहाली – पुस्तक 1820 में लिखी ।
(ii) हिन्दु उतराधिकार नियम – 1822

समाचार पत्र :- (i) संवाद कौमुदी – 1821 – बंगाली
(ii) आनन्द कौमुदी
(iii) तूहफात उल मुवाहिदिनी – 1809, भाषा – फारसी (एकेश्वरवादियों का तोहफा कहा जाता है)
(iv) मिरातूल अखबार – फारसी
(v) अंग्रेजी शिक्षा पर लॉर्ड एमहर्स्ट को 1823 में पत्र
◆ संवाद कौमुदी भारतीयों द्वारा संपादित प्रकाशित किया गया पहला समाचार पत्र था ।

यह भी पढ़ें>> स्वामी विवेकानन्द

प्रमुख कार्य :-
◆ राजा राममोहन राय ने 1814 में आत्मीय सभा के प्रचार में सहयोग किया था।
◆ राजा राममोहन राय ने 1817 में डच घड़ीसाज डेविड हेअर के सहयोग से कलकत्ता में हिन्दु कॉलेज की स्थापना की थी तथा 1825 में कलकत्ता में वेदान्त कॉलेज की स्थापना की थी ।
◆ राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त 1828 को ब्रह्म समाज की स्थापना की थी।
◆ राजा राममोहन राय के प्रयासों से लार्ड विलियम बैंटिक के काल में 4 दिसंबर 1829 को सत्ती प्रथा निवारण अधिनियम 17 पारित किया गया था।

राजा राममोहन राय की मृत्यु :-
◆ 1833 में मुगल शासक अकबर – II ने राजा राममोहन राय को राजा की उपाधि प्रदान करते हुए इंग्लैण्ड के सम्राट विलियम IV के दरबार में पेंशन बढ़वाने के लिए भेजा था।
◆ इंग्लैण्ड प्रवास के दौरान 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल नामक स्थान पर राजा राममोहन राय की मृत्यु हो गई थी।
◆ ब्रिस्टल में इनकी समाधि बनी हुई है जिस पर हरिकेली नाटक का आधा भाग अंकित किया गया है।
◆ उपमाएं :- भारतीय पुनर्जागरण का मसीहा, अतित और भविष्य के मध्य सेतु, आधुनिक भारत का पिता, सुभाष चंद्र बोस ने राजा राममोहन राय को युगदुत कहा है।

ब्रह्म समाज :-
◆ ब्रह्म समाज की स्थापना 20 अगस्त 1828 को राजा राममोहन राय के द्वारा की गई थी।
◆ 1828 से 1833 तक ब्रह्म समाज का नेतृत्व मोहन राय के द्वारा किया गया ।
◆ 1833 में मोहन राय की मृत्यु के पश्चात द्वारकानाथ टैगौर ब्रह्म समाज का नेतृत्व करता है ।
◆ 1843 में देवेन्द्र नाथ टैगौर को ब्रह्म समाज का नेतृत्व सौंपा जाता है।
◆ देवेन्द्रनाथ टैगौर के पश्चात 1861 में केश्वचन्द्र सैन आचार्य पद पर नियुक्त होते हुए ब्रह्म समाज का नेतृत्व करता है।
◆ 1865 में केश्वचन्द्र सैन ब्रह्म समाज से पृथक होता है जिसके कारण ब्रह्म समाज दो भागों में विभक्त हो गया था।
(i)आदि ब्रह्म समाज – देवेन्द्रनाथ टैगौर
(ii)तरुण ब्रह्म (भारतीय ब्रह्म समाज) – केश्वचन्द्र सैन

यह भी पढ़ें>> स्वामी दयानन्द सरस्वती

◆ केश्वचन्द्र सैन के प्रयासों से 1872 में ब्रह्म मेरीज एक्ट पारित हुआ था जिसमें बाल विवाह की आयु निर्धारित की गई थी ।
◆ 1878 में केश्वचन्द्र सैन अपनी अल्पायु पुत्री अनामिका का विवाह कुच बिहार के शासक के साथ करवाता है। जिसके कारण इस समाज में फुट पड़ती है और 1878 में आनन्द मोहन बोस के नेतृत्व में साधारण ब्रह्म समाज (दक्षिण ब्रह्म समाज) की स्थापना की जाती है।
◆ यह ब्रह्म समाज का दूसरा विभाजन था।
◆ देवेन्द्र नाथ टैगौर ने 1839 में तत्व बोधिनी सभा तथा तत्व बोधिनी स्कूल की स्थापना की थी।
◆ केश्वचन्द्र सैन के प्रयासों से श्री धरलु नायडू ने संगत सभा की स्थापना की थी।
◆ केश्वचन्द्र सैन के प्रयासों से 1867 में आत्माराम पांडुरंग ने महाराष्ट्र में प्रार्थना समाज की स्थापना की थी।

History Topic Wise Notes & Question

Leave a Comment