सहकारिता की प्रमुख योजनाएं | Major Schemes of Cooperatives

मिनी बैंक – एक ही स्थान पर सभी प्रकार के ऋणों की आवश्यता को पूरा करने के लिए शिवरमण कमेटी की अनुशंसा पर इसकी स्थापना 1984 में की गई है। (Major Schemes of Cooperatives)

नगरीय सहकारी बैंक – अर्द्ध – शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में कुटीर एवं लघु उद्योग के लिए ऋण प्रदान करने के लिए राज्य में 42 में नागरिक सहकारी बैंक एवं एक औद्योगिक बैंक कार्यरत है।

क्रय-विक्रय सहकारी समितियाँ – इसकी ईकाइयाँ क्रय-विक्रय सहकारी समितियाँ सभी जिलों में फैली हुई है। इसकी शीर्षस्थ संस्था राजस्थान राज्य सहकारी संघ लिमिटेड जयपुर है।

सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड योजना – इस योजना में किसान बैंक में कार्ड दिखाकर निर्धारित सीमा तक ऋण प्राप्त कर सकते है। ऐसी योजना लागू करने वाला राजस्थान प्रथम राज्य है। पहला सहकारी किसान क्रेडिट कार्ड जनवरी 1999 को श्री रामनिवास यादव गाँव सिरसी को प्रदान किया गया।

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अभिनव सहकारिता – प्रदेश में युवाओं के लिए अभिनव सहकारी समितियों का गठन कर रोजगार के अवसर सुलभ कराने की सहकारिता विभाग की यह योजना 2002-03 में प्रारम्भ हुई।

बेबी ब्लैककेंट योजना – राजस्थान राज्य सहकारी आवासन संघ द्वारा गृह निर्माण सहकारी समिति के सदस्यों को 10 लाख रुपये तक का ऋण 7 वर्ष के लिए महान मरम्मत हेतु स्वीकृत किया जाता है। (Major Schemes of Cooperatives)

सहकार जनमंगल आवास ऋण योजना – 50 हजार से अधिक की आबादी वाले कस्बों के नियमित आय के स्त्रोत वाले निवासियों को आवासीय व व्यावसायिक भवनों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु यह योजना जून, 2001 से प्रारंभ की गई योजना। इस योजनान्तर्गत सहकारी बैंक द्वारा 25 हजार रुपये से 5 लाख रुपये तक का ऋण दिया गया है।

सहकार सुगम कार्ड योजना – लघु व अति लघु उद्यमियों को व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु 50000 रुपये तक का ऋण केन्द्रिय सहकारी समितियों के माध्यम से उपलब्ध करवाने हेतु मई 2002 में यह योजना प्रारम्भ की गई। इसमें कार्ड धारक स्वीकृत साख सीमा में आवश्यकतानुसार ऋण प्राप्त कर सकता है। प्रथम सहकार सुगम कार्ड फागी तहसील की श्रीमती रक्षाकुमारी को दिया गया।

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ज्ञानसागर ऋण योजना – 18 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं को व्यावसायिक या उच्च शिक्षा में शिक्षा हेतु अधिकतम 3 लाख रुपये तक की (विदेश हेतु अधिकतम 5 लाख रुपये) ऋण राशि उपलब्ध करवाने की योजना है। यह योजना 11 सितम्बर 2002 को प्रारंभ की।

सहकार प्रभा योजना – इस योजना में किसानों को कृषि व सम्बद्ध कार्यों तथा कुटीर व ग्रामीण दस्तकारी कार्यों हेतु कृषि भूमि की प्रतिभूति पर 3 वर्ष के लिए अधिकतम 5 लाख रुपये तक का ऋण भूमि विकास बैंक के द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना 10 मई 2001 को प्रारंभ की गई।

कृषक ज्योति सहकारी ऋण वितरण योजना – 1998-99 में प्रारंभ इस योजना में सामाजिक, आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अधिकतम 10 वर्षों तक के लिए सहकारी बैंकों के द्वारा अधिकतम 5 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है।

अविका क्रेडिट कार्ड योजना – राज्य के भेड़पालकों को पशुधन के रखरखाव एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु केन्द्रिय सहकारी बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अंतर्गत भेड़पालकों को प्रति पशु 150 रुपये की दर से (अधिकतम 12,500 रुपये का) ऋण प्रदान किया जाता है। (Major Schemes of Cooperatives)

लैम्पस – वृहदाकार कृषि बहुउदेशिय सहकारी समितियाँ।

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पहल योजना – राजफ़ैड द्वारा जनजाति क्षेत्रों में कृषि उपज और वनोपज की सहकारी खरीद द्वारा आदिवासियों को शोषण से बचाने हेतु प्रारम्भ की गई योजना है।

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