Individual Differences Notes PDF व्यक्तिगत विभिन्नता नोट्स पार्ट – 2nd

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Individual Differences Notes PDF

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Individual Differences Notes in Hindi PDF, vyktigat vibhinta notes, व्यक्तिगत विभिन्नता नोट्स

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प्रतिभाशाली बालक (Gifted children)

अर्थ:-  प्रतिभाशाली बालक , सामान्य या औसत बालकों से सब बातों ( बुद्धि , विचार आदि ) में श्रेष्ठ होते हैं । ये बालक सामान्य बालकों से इतने अलग होते हैं कि इनके लिए विशेष प्रकार की शिक्षा , प्रशिक्षण और समायोजन की आवश्यकता होती हैं । अन्यथा ये दूसरे बालों के साथ और कक्षा में उचित प्रकार से समायोजित ( Adjust ) , नहीं हो पाते । मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रतिभाशाली वे बालक हैं जिनकी बुद्धि लब्धि ( I . Q . ) 1 30 या 140 से अधिक होती है । 

टरमन के अनुसार – “ प्रतिभावान बालक शारीरिक विकास , शैक्षणिक उपलब्धि , बुद्धि और व्यक्तित्व में वरिष्ठ होते है ।”

कॉलेसनिक के अनुसार – “ वह प्रत्येक बालक जो अपनी आयु – स्तर के बालकों में किसी योग्यता में अधिक हो और जो हमारे समाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण नई देन दें। ”  

प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएँ (Characteristics of Gifted child)

1. शारीरिक विशेषता – ट्रमन ने अपने अध्ययनों द्वारा स्पष्ट किया हैं कि प्रतिभाशाली बालक जन्म के समय सामान्य बालक की तुलना में डेढ़ इंच लम्वा वे भार में एक पौण्ड अधिक होता है । इसके अतिरिक्त वह चलना , फिरना और बोलना , सामान्य बालर्को की तुलना में जल्दी सीख लेता है । 

2 . उच्च बुद्धि – लब्धि – प्रायः इनकी बुद्धि लब्धि 140 से अधिक मानी गई है ।
3 . अमूर्त चिन्तन – इनकी चिन्तन प्रक्रिया श्रेष्ठ होती है । जिससे वे कठिन समस्याओं को समझाने तथा समाधान ढूढ़ने में देर नहीं करते ।
4.  सामाजिक और संवेगात्मक दृढता – प्रतिभाशाली बालकों की सामाजिकता और संवेगात्मकता अधिक दृढ़ होती हैं ।
5 . मानवीय गुण – इनमें सहयोग , परोपकार , सहिष्णुता , दया तथा ईमानदारी जैसे मानवीय गुण दूसरों की तुलना में अधिक होते हैं ।

6 . अंतर्दृष्टि – ऐसे बालक आश्चर्यजनक सूझबूझ रखते है ।
7 . नेतृत्व की क्षमता – ऐसे बालकों में कुशल नेतृत्व की क्षमता होती हैं और अपने इस नेतृत्व से सबका मन मोह लेते है ।
8 . अवधान योग्यता – प्रतिभाशाली बालकों में अवधान की शक्ति तीव्र होती
9 . निर्देशन की कम आवश्यकता – ऐसे बालकों में बौद्धिक सजगता और मौलिकता अधिक होती हैं अतः वह अपने पूर्व अनुभव व सूझबूझ से कार्य को सफलतापूर्वक कर सकता है । ऐसे बालकों को निर्देशन की आवश्यकता कम पड़ती है ।
10 . हास्य तथा उदार प्रकृति – ऐसे बालकों की ज्ञानेन्द्रियाँ अधिक संवेदनशील होती हैं । सामान्यतः ये हास्य तथा उदार प्रकृति के होते हैं ।

प्रतिभावान बालकों की शैक्षिक व्यवस्थाएँ (Educational Provisions for Gifted Children)

1 . विशेष व विस्तृत पाठ्यक्रम ।
2 . बालर्को पर व्यक्तिगत ध्यान ।
३ . योग्य अध्यापकों की आवश्यकता ।
4 . पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं का आयोजन ।
5 . पुस्तकालय सुविधायें ।
6 . नेतृत्त्व का प्रशिक्षण ।
7 . संस्कृति की शिक्षा ।
8 . विशेष स्कूल और कक्षायें ।
9 . घर के लिए विशेष कार्य ।
10 . उत्तरदायित्व का कार्य ।
11 . सर्वांगीण विकास पर बल । (Individual Differences Notes PDF, Individual Differences Notes in Hindi PDF, Individual Differences Class Notes, vyktigat vibhinta notes)

बाल – अपराधी बालक (Delinquent Children)

बाल अपराध का सम्बन्ध बालक के व्यक्तित्व के सभी पक्षों से होता हैं , जैसे – सामाजिक पक्ष , संवेगात्मक पक्ष और मानसिक पक्ष । किसी भी पक्ष में समायोजन करने में यदि बालक असफल रहता है , तो वह बालक बाल – अपराधी बन जाता हैं । बाल अपराध का शाब्दिक अर्थ हैं सामान्य रास्ते से भटक जाना ।

हैडफील्ड के अनुसार – “ बाल अपराध का अर्थ हैं – असामाजिक व्यवहार ।”
स्किनर के अनुसार – “बाल अपराध की परिभाषा किसी कानून के उस उल्लघंन के रूप में की जाती हैं , जो किसी वयस्क द्वारा किये जाने पर अपराध होता हैं ।”

बाल – अपराध के कारण

1 . वंशानुक्रम सम्बन्धी कारण
2.  वातावरण सम्बन्धी कारण

(a) पारिवारिक वातावरण

● माता – पिता का बालकों पर नियंत्रण न रहना ।
● घरेलू लड़ाई झगड़े ।
★ परिवार में माता – पिता के सम्बन्ध विच्छेद या किसी एक की मृत्यु हो जाना ।
● पारिवारिक निर्धनता ।
● घर में बच्चों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया ।
★ बालकों की रूचियों की ओर ध्यान न देना ।
● बालकों को आवश्यक स्वतन्त्रता प्रदान न करना ।
● बालकों की बेकारी की समस्या ।
★ सौतले माता – पिता का होना ।
● घर के अन्य सदस्यों का अपराधी होना ।
● माता – पिता का अनैतिक व्यवहार ।
★ माता – पिता के शारीरिक व मानसिक दोषों के कारण जैसे – अन्धा , पागल , अपाहिज होना ।
● बालकों की आवश्यकताओं को पूरा न कर पाना ।
● परिवार में अधिक बच्चे होने के कारण ।
★ परिवार में बच्चों का स्थान ।

(b) स्कूल का वातावरण 

● व्यक्तिगत विभिन्नताओं की और ध्यान न देना ।
● पाठ्य – सहगामी क्रियाओं की कमी ।
★ उचित मार्गदर्शन की कमी ।
● कठोर अनुशासन ।
● अधिक गृहकार्य ।
★ दूषित पाठ्यक्रम ।
● शिक्षकों का व्यवहार ।
● विद्यालय में राजनैतिक वातावरण ।
★ मित्रमण्डली ।
● असफलता एवं पिछड़ापन ।

(c) समाज का वातावरण

● समाज का दूषित वातावरण ।
● बेरोजगारी ।
★ गन्दी बस्तियाँ ।
● बुरी संगति ।
● सिनेमा ।
★ अश्लील साहित्य ।

3 . शरीर रचना सम्बन्धी कारण

बाल अपराधियों की विशेषताएँ

शारीरिक- आयताकृति, पुष्ट मांसपेशियों युक्त एवं दुस्साहसी । स्वभावगत – अशांत , शक्ति से भरपूर , आक्रमक , बर्हिमुखी , शीघ्र उद्वेलित , विध्वंसात्मक ।
अभिवृत्तियाँ – अपारम्परिक , संदेही , सत्ता के विरोधी , द्वेषपूर्ण एवं शत्रुता भाव रखने वाले ।
मनोवैज्ञानिक – मूर्त एवं प्रत्यक्ष की ओर झुकाव रखने वाले , समस्याओं के समाधान में कम व्यवस्थित ।
सामाजिक सांस्कृतिक – स्नेह या अभाव , माता – पिता के नैतिक मानदण्ड इन्हें पर्याप्त रूप में निर्देशित नहीं कर पाते । Individual Differences Notes in Hindi PDF, Individual Differences Class Notes, vyktigat vibhinta notes

बाल अपराधी के कृत्य

1 . चोरी , उठाईगिरी ।
2 . भगोड़ापन ।
3 . निरुद्देश्य भटकना ।
4 . जेब काटना ।
5 . धोखाधड़ी , ठगी ।
6 . जुआ खेलना ।
7 . उपदव , हमला , लड़ना एवं क्रुरता ।
8 . सम्पत्ति को क्षति पहुँचाना ।
9 . यौन अपराध ।
12 . हत्या ।
11 . मादक पदार्थों का सेवन ।

बाल अपराधों की रोकथाम

1 . परिवार के वातावरण में सुधार ।
2 . स्कूल के वातावरण में सुधार ।
3 . समाज के वातावरण में सुधार ।
4 . मनोवैज्ञानिक विधि ।
5 . मानसिक चिकित्सा ।
6 . मनो – विश्लेषण विधि ।
7 . विशेष बाल न्यायालय ।

विकलांग बालक ( Physically Handicapped children)

अर्थ :- कुछ बालक ऐसे होते हैं जिनके शरीर का कोई न कोई अंग जन्म से ही दोषपूर्ण होता हैं । या किसी बड़ी बीमारी , चोट , दुर्घटना आदि के कारण शरीर के विसी न किसी अंग में दोष आ जाता है । ऐसे बालकों को विकलांग बालक कहते हैं

विकलांग बालकों के प्रकार ( Kinds of Handicapped Childrens )

1 . शारीरिक रूप से विकलांग बालक:- शारीरिक रूप से विकलांग बालक वे होते हैं जिनमें कोई शारीरिक त्रुटि होती हैं और वह श्रुटि उनके काम – काज में किसी न किसी प्रकार की बाधा डालती है । इनका वर्गीकरण निम्न हैं
अपंग बालक:- अन्धे , लूले , लंगड़े , बहरे , गुंगे आदि अपंग कहलाते हैं ।
2 . मानसिक रूप से विकलांग बालक:- इस प्रकार के बालकों में मूर्ख , निम्न बद्धि वाले या मन्द गति से सीखने वाले बालकों की गणना होती हैं । इन बालकों का वर्गीकरण बुद्धि – लब्धि  के आधार पर किया जाता हैं ।
3 . संवेगात्मक और सामाजिक रूप से विकलांग बालक:- इस श्रेणी में बाल अपराधी बालकों की गिनती होती हैं । अर्थात् वे बालक जो संवेगात्मक और सामाजिक रूप से कुसमायोजित हों ।

विकलांग बालकों की शिक्षा

शारीरिक रूप से विकलांग बालकों की शिक्षा सामान्य बालकों के साथ सम्भव नहीं । इन विकलांग बालकों को अधिगम और समायोजन संबंधी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है । इन समस्याओं के परिणाम स्वरूप बालकों में हीन भावनाओं ( Inferiority Celirigs ) का विकास होता है । अतः विभिन्न दृष्टिकोण से विकलांग बालकों को विशेष शैक्षणिक सुविधायें प्रदान की जानी चाहिए ।
पिछड़े बालक या मन्द गति से सीखने वाले बालक:- पिछड़े बालकों से तात्पर्य उन बालकों से हैं । जो कक्षा में किसी बात को बार बार समझाने पर भी नहीं समझते हैं या औसत दर्जे के बालकों के समान प्रगति करने में असमर्थ रहते है। Individual Differences Notes in Hindi PDF, Individual Differences Class Notes, vyktigat vibhinta notes, व्यक्तिगत विभिन्नता नोट्स pdf file

पिछड़े बालकों का वर्गीकरण

1 . वातावरण और परिस्थितियों के कारण पिछड़े बालक ।
2 . मन्द बुद्धि वाले पिछड़े बालक ।
3 . शारीरिक दोष के कारण पिछड़े बालक ।
4 . शिक्षा के अभाव से पिछड़े बालक ।
5 . संवेगात्मक दृष्टि से पिछड़े बालक ।

विशेषताएँ

1 . इन बालकों में दृष्टि , वाणी एवं श्रवण दोष पाये जाते हैं ।
2 . इन बालकों में अमूर्त चिन्तन की योग्यता व बौद्धिक कौशल सीमित मात्रा में पाया जाता है ।
3 . इन बालों की तर्क शक्ति व ध्यान संकेन्द्रण की क्षमता भी सीमित पाई जाती है ।
4 . इन बालकों को सामान्यीकरण में कठिनाई होती है ।
5 . इन बालक का सीखने के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण होता है ।
5 . इन बालर्को में नकारात्मकता , अपरिपक्वता , क्षतिपूरक गतिविधयाँ जैसी नकारात्मक समायोजन युक्तियों का प्रयोग पाया जाता हैं ।
7 . ऐसे बालक निरन्तर ध्यान एवं अध्यापक की सहमति चाहते हैं ।
8 . इन बालों में उत्तरदायित्व ग्रहण करने की क्षमता सीमित होती है ।
9 . ये बालक दूसरों पर निर्भर रहते हैं ।
10 . इन बालकों में जिज्ञासा प्रवृत्ति नहीं होती ।
11 . इन बालकों में हीनता की भावना , दुश्चिंता व असफलता का भय पाया जाता है ।

पिछड़ेपन व धीमी गति से सीखने वाले बालकों की शिक्षा

पिछड़ेपन के उपचार की कोई एक विधि या उपाय नहीं हैं जो कि सभी बालको पर समान रूप से अपनाया जा सके । प्रत्येक पिछड़ा बालक अनूठा है । अतः प्रत्येक पिछड़े बालक को व्यक्तिगत ध्यान व नियोजित उपचार की आवश्यकता होती है । निम्न बिन्दु शैक्षिक कार्यक्रम के आयोजन एवं क्रियान्वयन में सहायक हो सकते हैं ।
1 . वैयक्तिक उपचार
2 . अभिप्रेरणा
3 . अधिगम तत्परता
4 . मूर्त रूप से अध्ययन
5 . माता – पिता का सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण
6 . कक्षा का आकार
7 . विशिष्ट विद्यालय
8 . उचित शैक्षिक निर्देशन

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