हिन्दी साहित्य का इतिहास नोट्स | Hindi Sahitya ka Itihas

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दोस्तो आज इस पोस्ट में हम हिन्दी साहित्य के हस्तलिखित नोट्स उपलब्ध करवा रहे है जो सभी परीक्षाओ जैसे – स्कूल व्याख्याता, द्वितीय श्रेणी अध्यापक परीक्षा, UGC NET, SET, कॉलेज व्याख्याता, एवं अन्य सभी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है। हिन्दी साहित्य का इतिहास के हस्तलिखित क्लास नोट्स की पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए नीचे टेबल में लिंक दिया गया है जिस पर क्लिक करके बिल्कुल फ्री में नोट्स की पीडीएफ फ़ाइल डाउनलोड कर सकते है।

Table of Contents

हिन्दी साहित्य का इतिहास नोट्स

इस पीडीएफ में:-
1. हिन्दी साहित्य का इतिहास: एक परिचय
2. आदिकाल (1000 ई. से 1350 ई. तक)
3. भक्तिकाल (1350 ई. से 1650 ई. तक)
4. रीतिकाल (1650 ई. से 1850 ई. तक)
5. आधुनिक काल (1850 ई. से अब तक)
i. भारतेन्दु युग
ii. द्विवेदी युग
iii. छायावादी युग
iv. प्रगतिवादी युग
v. प्रयोगवाद
vi. नवलेखन युग
6. गद्य साहित्य का इतिहास
i. उपन्यास विधा
ii. कहानी विधा
iii. नाटक विधा
iv. एकांकी विधा
v. आत्मकथा विधा
vi. जीवनी विधा
vii. आलोचना विधा
viii. निबंध विधा
ix. संस्मरण एवं रेखाचित्र विधा
x. रिपोर्ताज विधा
xi. पत्र-साहित्य विधा

टॉपिकपीडीएफ़ लिंक
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आदिकालClick Here
भक्तिकालClick Here
रीतिकालClick Here
आधुनिक कालClick Here
गद्य साहित्य का इतिहासClick Here

Hindi Sahitya ka Itihas

इतिहास की व्युत्पति एवं अर्थ –

इतिहास शब्द इति + अस् + अ के योग से बना है।
‘इति’ का अर्थ – समाप्त
‘ह’ का अर्थ – निश्चित
‘अस्’ का अर्थ – होना
अर्थात जिसकी निश्चित रूप से समाप्ति हो चुकी है उसे इतिहास कहते है।

इतिहास की परिभाषाएं –
महर्षि वेदव्यास के अनुसार – एसी रचना जिसमें धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पुरूषार्थ के उपदेशों का समन्वय किया जाता है। तथा जिसमें पूर्व में घटित हो चुकी घटनाओं का समावेश किया जाता है। उसे इतिहास कहते है।
प्रो. कार्लाइल के अनुसार – इतिहास एक एसा दर्शन है जो पूर्वजों द्वारा शिक्षा प्रदान करता है।

साहित्य शब्द की व्युत्पति एवं अर्थ –
साहित्य शब्द – सा + हित् + य के योग से बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – मिश्रण। अर्थात गद्य पद्य के समेकित रूप को ही साहित्य कहा जाता है।

साहित्य की परिभाषाएं –
शब्द कोश के अनुसार – किसी भी व्यक्ति के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का विशेषण करना ही साहित्य कहलाता है।
आचार्य रामचन्द्र शुल्क के अनुसार – प्रत्येक देश का साहित्य वहाँ की जनता की चितवृतियों का संचित प्रतिबिंब होता है। यह निश्चित है की इन चितवृतियों में जैसे – जैसे परिवर्तन आता है। वैसे – वैसे ही साहित्य के स्वरूप में भी परिवर्तन होता चला जाता है। आदि से लेकर अंत तक इन्हीं चितवृतियों की परम्परा को परखते हुए साहित्य परम्परा के साथ उनका सामंजस्य बैठाना ही साहित्य का इतिहास कहलाता है।
डॉ. नगेन्द्र के अनुसार – साहित्य का इतिहास बदलती हुई अभिरुचियों एवं संवेदनाओं का इतिहास होता है जिसका मुख्य संबंध आर्थिक एवं चिंतजनात्मक परिवर्तन से माना जाता है।

साहित्य लेखन की प्रमुख पद्धतियाँ –
साहित्य भी भाषा के साहित्य का इतिहास लिखने के लिए प्रमुखतः निम्न चार पद्धतियों का प्रयोग किया जाता है।

  1. वर्णानुक्रम पद्धति
  2. कालानुक्रम पद्धति
  3. वैज्ञानिक पद्धति
  4. विधेयवादी पद्धति

हिन्दी साहित्य इतिहास लेखन का आरम्भिक स्वरूप – हिन्दी साहित्य इतिहास लेखन की वास्तविक शुरुवात तो 1839 से हुई मानी जाती है। परंतु इससे पहले भी अनेक ऐसी रचनाएं प्राप्त होती है जिससे हिन्दी साहित्य इतिहास के कुछ लक्षण देखे जा सकते है।

क्र. सं. रचना का नाम रचनाकार का नाम
1.चोरासी वैष्णवन की वार्तागोस्वामी / गोसाई गोकुलनाथ
2.दो सो बावन बावन वैष्णवन की वार्ता
3.भक्तमालनाभादास
4.वल्लभ दिग्विजययदुनाथ
5.कालिदास हजाराकालिदास त्रिवेदी
6.कविमालाहरीराम (तुलसी)
7.सुंदरी तिलकहरिश्चंद्र
8.राग कल्पद्रुम / राग सागरोद्भवकृपणानन्द व्यास देव
9.विचित्रोपदेशककछेदी तिवारी
10.विद्वान मोद तरंगिणीसुब्बा सिंह
11.काव्य निर्णयभिखरीदास
12.भक्त नामावलीध्रुवदास
13.कवि नामावलीसूदन
14.मूल गुसाई चरितबाबा वेणीमाधव दास
15.कवित रत्नाकरमतादिन

हिन्दी साहित्य इतिहास के आरम्भिक पाँच लेखक

  1. सर्वप्रथम प्रयासकर्ता – गार्सा द तासी (1839) फ्रेंच
  2. सर्वप्रथम प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार – शिव सिंह सेंगर (1883) हिन्दी
  3. सच्चे अर्थों में सर्वप्रथम इतिहासकार – जॉर्ज गियर्सन (1888) अंग्रेजी
  4. सर्वप्रथम परम्परागत इतिहासकार – मिश्र बंधु (1913) हिन्दी
  5. सच्चे अर्थों में सर्वप्रथम परम्परागत इतिहासकार – आचार्य रामचन्द्र शुल्क (1929)

हिंदी साहित्य का इतिहास अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – हिंदी साहित्य को कितने काल में बांटा गया है?

उत्तर – हिन्दी साहित्य इतिहास के काल विभाजन का प्रयास करने वाले प्रथम विद्वान जॉर्ज ग्रीयर्सन ही माने जाते है। इन्होंने सम्पूर्ण हिन्दी साहित्य को 12 काल खंडों में विभाजित किया है।

प्रश्न – हिंदी साहित्य के इतिहास का प्रथम लेखक कौन है?

उत्तर – आचार्य रामचन्द्र शुल्क (1929)

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