फ्रांस की राज्यक्रांति | France ki Kranti Notes in Hindi

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फ्रांस की राज्यक्रांति | France ki Kranti Notes in Hindi: इतिहास की इस पोस्ट में फ्रांस की क्रांति से संबंधित नोट्स एवं महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई गई है जो सभी परीक्षाओं के लिए बेहद ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है France ki Kranti Notes

फ्रांस की राज्यक्रांति | France ki Kranti Notes in Hindi

👉🏻 इतिहास में जितनी सहानुभूति व आक्रोश फ्रांस की क्रांति के लिए प्रकट किया गया है उतना विश्व में किसी भी क्रांति के लिए नहीं किया गया।
👉🏻 कांट, हैगल व वर्डसवर्थ ने इस क्रांति पर खुशी व्यक्त की है जबकि एडमड बर्क ने इस क्रांति पर शेष प्रकट किया है।
👉🏻 14 जुलाई 1789 को बास्तील के दुर्ग का पतन हुआ तथा सामान्यतः इसी दिन को इस क्रांति की शुरूआत मानी जाती है।

क्रांति के कारण

1. राजनीतिक कारण

👉🏻 फ्रांस के बुर्बो राजवंश द्वारा अपने अधीनस्थों को राजमुद्रा युक्त अधिकार पत्र दिया जाता था, यह ‘लेटर डी केचेत‘ कहलाता था।
👉🏻 इसके माध्यम से किसी भी व्यक्ति को असीमित समय तक बंदी बनाकर रखा जा सकता था।
👉🏻 यह भारत के ‘रोलेट एक्ट ‘ के समान था।
👉🏻 फ्रांस में इस समय ‘पार्लमा‘ नामक संस्था कार्यरत थी। जिसकी स्थिति आधुनिक न्यायपालिका के समान होती थी।
👉🏻 फ्रांस में इनकी कुल संख्या 13 थी तथा प्रत्येक पार्लमा में 13 ही सदस्य होते थे।
👉🏻 यह संस्था राजा द्वारा बनाये गये कानूनों को पंजीकृत करती थी तथा उपयुक्त न होने पर केवल एक ही बार विचार के लिए राजा को लौटा सकती थी।
👉🏻 क्रांति के कुछ वर्ष पूर्व इसके राजा के कानूनों को मानने से इन्कार कर दिया।
👉🏻 इस समय फ्रांस में दो प्रकार के प्रांत होते थे प्राचीन प्रान्त गवर्नमेंट कहलाते थे।
👉🏻 गवर्नमेंट की कुल संख्या 40 थी तथा इनका शासन घनाढय सामंतो द्वारा चलाया जाता था।
👉🏻 ये सामंत राष्ट्र की समाधि माने जाने वाले वर्साय के महल में रहते थे।
👉🏻 इनका शासन व्यवस्था में कोई योगदान नहीं था।
👉🏻 दूसरे प्रकार के प्रांत ‘जेनरालिटे‘ कहलाते थे।
👉🏻 जैनरालिटे की कुल संख्या 34 थी।
👉🏻 इनके प्रमुख एतादा (Intendent प्रतिनिधि) होते थे।
👉🏻 शासन का वास्तविक कार्य यही करते थे तथा ये केवल राजा के प्रति उत्तरदायी होते थे।
👉🏻 फ्रांस में इस 385 प्रकार के न्याय विधान (कानून) प्रचलित थे अर्थात कुछ दूरी पर ही ये कानून बदलते रहते थे।
👉🏻 इसी सम्बंध में वाल्तेयर ने कहा है – ‘‘फ्रांस में कानून उसी प्रकार बदलते है जिस प्रकार गाड़ी के घोड़े।‘‘
👉🏻 इस समय फ्रांस की अदालती भाषा लेटिन थी जबकि आम लोगों की भाषा फ्रेंच थी।
👉🏻 फ्रांस में फिलीन द्वारा 1602 ई में एस्टेट जनरल नामक प्रतिनिधि संस्था की स्थापना की गई थी।
👉🏻 इसमें तीन वर्ग शामिल होते थे।
1.पादरी 2.कूलीन 3.बुर्जुवा वर्ग
👉🏻 बुर्जुवा वर्ग जनसाधारण का वर्ग था जिसमें नौकरी-पैसा, डॉक्टर, वकील आदि सम्मिलित होते थे।
👉🏻 1614 में इसकी अंतिम बैठक बुलायी गई थी।
👉🏻 फ्रांसीसी जंनता के आक्रोश को देखते हुए लुई XVI को 175 वर्ष पश्चात इसकी बैठक बुलानी पडी थी।
👉🏻 5 मई, 1759 को आहूत की गई इस बैठक को ही कुछ विद्वान फ्रांसीसी क्रांति का प्रारंम्भ मानते है।
👉🏻 इस सभा में प्रत्येक वर्ग को एक-एक मत होता था परन्तु इस बार तृतीय वर्ग एक व्यक्ति एक वोट को अपनाने पर जोर दिया तथा ‘एस्टेट जनरल‘ का बहिष्कार कर दिया।
👉🏻 फ्रांस के इण्डोर टेनिस कोर्ट में तृतीय वर्ग द्वारा सभा बुलायी गई थी तथा 17 जून, 1789 को सभा ने स्वयं को राष्ट्रीय एसेम्बली घोषित कर दिया।

2. सामाजिक कारण

👉🏻 इस समय फ्रांस का समाज तीन वर्गो में विभक्त था।

(1) प्रथम एस्टेट पादरी वर्ग :-

👉🏻 फ्रांस में रोमन केथोलिक इसाई धर्म प्रचलित था।
👉🏻 यह पादरी वर्ग भी दो भागों में विभक्त था।
👉🏻 उच्च श्रेणी के पादरियों की नियुक्तियां स्थानीय गिरिजाघरों में होती थी।
👉🏻 निम्न पादरी वर्ग की आम जनता के रीति-रिवाजों व संस्कारों में शामिल होता था तथा क्रांति के समय इसी वर्ग ने जनता का साथ दिया।
👉🏻 चर्च के पास फ्रांस की कृषि योग्य भूमि का 20 प्रतिशत होता था तथा ये आम जनता से ‘टीथ‘ (टाइथ) नामक कर वसूलते थे।
👉🏻 यह धर्माश कर उपज का दशवाँ भाग होता था।

(2) द्वितीय एस्टेट कूलीन वर्ग :-

👉🏻 करों के अत्यधिक बोझ के कारण आम जनता को भूमि बेचनी पड़ती थी तथा इस क्रय विक्रय पर ये 1/5 वाँ भाग वसूलते थे।
👉🏻 आम जनता का शोषण इसी वर्ग द्वारा अधिक किया गया था।
👉🏻 थियर्स नामक विद्वान ने लिखा है कि क्रांति राजतंत्र के विरूद्ध न होकर कूलीन तंत्र के विरूद्ध थी।

(3) तृतीय एस्टेट – जनसाधारण वर्ग :-

👉🏻 फ्रांस की 94 प्रतिशत जनसंख्या इसी वर्ग के अन्तर्गत आती थी।
👉🏻 इनके पास फ्रांस की कृषि योग्य भूमि का केवल 10 प्रतिशत होता था।
👉🏻 यह वर्ग भी दो भागों में विभक्त था।
👉🏻 मध्यम वर्ग में शिक्षाविद्, नौकरी-पेशा तथा व्यापारी आते थे तथा यही वर्ग बुर्जुवा कहलाता था, जिसके द्वारा फ्रांस की क्रांति सम्पादित हुई।
👉🏻 कृषक वर्ग को अपनी उपज का 20 प्रतिशत भूमिकर राज्य को देना होता था। यह कर टेली (टाइल) कहलाता था

3. बौद्धिक कारण

👉🏻 पुनर्जागरण के पश्चात सम्पूर्ण यूरोप में बौद्धिक चिन्तन होने लगा।
👉🏻 विद्वानों ने पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से प्राचीन धन व्यवस्था, सामंतीव्यवस्था व राजतंत्र के विरूद्ध आम जनता को जागृत किया। बब चर्च द्वारा ये पत्र पत्रिकाएं सेंसर (प्रतिबंधित) की जाने लगी।
👉🏻 विद्धानों ने संगोष्टियों के आयोजन का तरीका अपनाया।
👉🏻 ये संगोष्ठियां सेलों कहलाती थी।
👉🏻 नेपोलियन ने कहा है – ‘अगर रूसी न होता तो फ्रांस की क्रांति भी नहीं होती ।‘

4.  तात्कालिन कारण

👉🏻 सप्तवर्षीय युद्धों तथा अमेरिका उपनिवेशों को स्वतंत्र करवाने में फ्रांस का कुल 10 अरब लीब्रे का कर्ज हो गया था।
👉🏻 लुई ने तुर्गो नामक योग्य व्यक्ति को अपना वित्त मंत्री बनाया।
👉🏻 तुर्गो ने सड़कों पर करवायी जाने वाली बेगार प्रथा ‘कोरवी‘ को समाप्त किया।
👉🏻 कुलीन तंत्र द्वारा गिल्ड स्थापित किये गये थे जिस वजह से वस्तुओं की कीमते बढ़ गई थी।
👉🏻 सामन्त वर्ग द्वारा मजदूरों से तीन दिन तक बेगार प्रथा करवायी जाती थी। (सप्ताह में तीन दिन) जिसके बदले ‘क्विट‘ मनी दी जाती थी।
👉🏻 इसके अलावा गेब्बेल नामक कर वसूला जाता था।
👉🏻 सात वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तिों को 7 पौंड नमक प्रतिवर्ष खरीदना होता था।
👉🏻 तुर्गो के पश्चात नेकर वित मंत्री बना।
👉🏻 इसने राज्य की आय तथा व्यय का ब्यौरा जनता के समाने रख दिया जिससे जनता को पता चला कि उसका कितना आर्थिक शोषण होता है।
👉🏻 नेकर के पश्चात फ्लरी तथा केलोन वित्त मंत्री बनाये गये।
👉🏻 केलोन के कुलीन तंत्र के अधिकारों पर चोट की जिस वजह से मेरी अंतावनोज के कहने पर लुई XVI ने ब्रीन को वित्त मंत्री बनाया।
👉🏻 5 मई, 1789 को एस्टेट जनरल की प्रथम बैठक हुई।
👉🏻 प्रथम वर्ग (पादरी) के 308 सदस्य द्वितीय वर्ग के 285 व तृतीय वर्ग के 621 सदस्य थे।
👉🏻 इनकी बैठके अलग-अलग होती थी।
👉🏻 तृतीय वर्ग ने संयुक्त बैठक की माँग की जिसे ठुकरा दिया गया।
👉🏻 पादरी वर्ग के लगभग 200 सदस्य तृतीय वर्ग से जा मिले तथा 17 जून, 1789 को स्वंय को राष्ट्रीय असेम्बली घोषित कर दिया।
👉🏻 तीनों वर्गो में कुल मिलाकर 1214 सदस्य (308+285+621) थे। (France ki Kranti Notes)

👉🏻 20 जून, 1789 को जब ये सदस्य सभा भवन पहूँचे तथा भवन का दरवाजा न खुलने पर पास ही स्थित टेनिस कोर्ट में जमा हुए तथा संविधान की माँग की।
👉🏻 यह प्रस्ताव मोनियर द्वारा रखा गया तथा मिराब्यों व आबासिये ने इस सभा का प्रतिनिधत्व किया।
👉🏻 यह टेनिस कोर्ट की शपथ कहलाता है।
👉🏻 पेरिस की आंशिक भीड़ ने भूखमरी व बेरोजगारी से तंग आकर राजसी घृणा के प्रतीक माने जाने वाले बास्तीय दूर्ग को 14 जुलाई 1789 को जीत लिया।
👉🏻 इस समय इस दुर्ग का रक्षक ढ-लाने था।
👉🏻 इस क्रांति के प्रतीक के रूप में लाल, सफेद व नीले रंग के झण्डे का प्रयोग किया गया।
👉🏻 पेरिस नगर में एक कम्यून सरकार बनायी गई।
👉🏻 पेरिस का मेयर बेयली को चूना गया तथा नगर की सुरक्षा प्रमुख अधिकारी लाफायेत को बनाया गया।
👉🏻 17 जुलाई, 1789 को लुई XVI फ्रांस आया तथा उसने क्रांति तमगे को भारी मन से अपने सीने पर लगाया।
👉🏻 4 अगस्त, 1789 को सामंती प्रथा का अंत कर दिया गया तथा सभी वर्गो पर एक समान प्रणाली लागू की गई।
👉🏻 27 अगस्त, 1789 को मानवाधिकारों की आधारभूत घोषणा की एवं सेंसरशिप को समाप्त कर दिया गया।

फ्रांस में इस समय दो राजनीतिक दल थे:-

1. जेरोंदिस्त

👉🏻 ये राजतंत्र के विरोधी थे।
👉🏻 ये फ्रांस में प्रजातंत्र की स्थापना करना चाहते थे तथा बौद्धिक दृष्टिकोण वाले थे विचारक अनुभवहीन थे।
👉🏻 जोनसेन, मादमरोला व ब्रीसो इसके प्रमुख सदस्य थे।
👉🏻 ब्रीसों ने ही प्रेट्रियाट नामक पत्रिका प्रकाशित की थी।

2. जेकोबिन

👉🏻 ये क्रान्तिकारी विचारधारा के थे।
👉🏻 उच्च आसन्नों पर बैठने के कारण इन्हें Mountain कहा जाता था।
👉🏻 रोबेस्पियर इस दल का प्रमुख नेता था।
👉🏻 टीपू सूल्तान ने मैयूर में इस दल का पौधा स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में लगाया था तथा नेपोलियन बोनापार्ट भी अपने आरम्भिक दिनों में इसी विचारधारा से प्रभावित था।

👉🏻 1791 में फ्रांस में संविधान का निर्माण किया गया जिसने कानून बनाने की शक्ति विधयिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका को स्थानान्तरित कर दी।
👉🏻 ये विधानमण्डल के सदस्य एक निर्वाचक मण्डल द्वारा चुने जाते थे तथा इस मण्डल का चुनाव 25 वर्ष से अधिक आयु के वे ही पुरूष करते थे जो सप्ताह में तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे।
👉🏻 राजा ने नये संविधान पर हस्ताक्षर तो कर दिये ये परन्तु अभी भी वह गुप्त रूप से आस्ट्रिया व प्रशा से बातचीत कर रहा था।
👉🏻 यह क्रांति अन्य राष्ट्रों के लिए (युरोप) चिंता का विषय थी, अतः उन्होनें फ्रांस में अपनी सेनाएं भेजने का निर्णय लिया।
👉🏻 रोजेट डी लाइस द्वारा लिखित ‘मार्सिले‘ इस समय राष्ट्र भक्ति का प्रतीक माना गया।
👉🏻 वर्तमान में मार्सिले फ्रांस का राष्ट्रगान है। (France ki Kranti Notes)
👉🏻 20 अप्रैल, 1792 को फ्रांस ने आस्ट्रिया के विरूद्ध युद्ध की घोषणा कर दी तथा निम्न वर्ग की जनता इस समय भूखमरी से परेशान होकर 10 अगस्त, 1792 को पेरिस में स्थित तुलरिन के महल पर धावा बोल दिती है तथा लूई XVI गिरफ्तार किया गया।
👉🏻 National Assembly को भी इस जनता के सामने झुकना पड़ा तथा नये चुनाव करवाये गये।
👉🏻 असेम्बली को ‘कन्वेशन‘ नाम दिया गया।
👉🏻 21 सितम्बर, 1792 को फ्रांस को गणराज्य घोषित किया गया।
👉🏻 इस द्वितीय क्रांति में जेकोबिन दल का मुख्य योगदान था।
👉🏻 21 जनवरी, 1793 को पैलेस डी कोन्सर्ड महल में फासी की सजा दी गई।
👉🏻 1793-94 तक का काल ‘आतंक का युग‘ कहलाता है।
👉🏻 1791 में ‘ओलम्प दे गुज‘ ने महिला अधिकार घोषणा पत्र तैयार किया।
👉🏻 1946 में ही फ्रांसीसी महिला को मताधिकार प्राप्त हो सका।
👉🏻 रोबेस्पीयर इस आतंक का पर्याय बन चुका था।
👉🏻 इसने फ्रांस में प्रचलित सभी रीति-रिवाजों को पलट दिया।
👉🏻 इस एक साल में कुल 30,000 राजनीतिक बन्दियों को गिलेटिन नामक यंत्र से मार दिया गया।
👉🏻 अंत में रोबेस्पीयर के समर्थको ने उससे दुःखी होकर उसे ही इस गिलेटिन पर चढ़ा दिया।
👉🏻 1795 में कन्वेशन की जगह डायरेक्ट्री ने ले ली जिसमें कुल 5 सदस्य होते थे।
👉🏻 प्रत्येक सदस्य 5 साल के बाद पद त्यागता था।
👉🏻 नेपोलियन बोनापार्ट का उदय इसी विद्रोही काल में हुआ था।
👉🏻 नेपोलियन बोनापार्ट का जन्म 15 अगस्त, 1765 को कोर्शिका द्वीप में हुआ।
👉🏻 इसने ब्रीये तथा पेरिस के सैनिक विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त की।
👉🏻 1785 में इसे द्वितीय लैप्टिनेट का पद मिला तथा 1793 में इसने सर्वप्रथम तूलो के बंदरगाह को अंग्रेजों से आजाद कराया। यह इसके सैनिक जीवन की प्रथम विजय थी।

👉🏻 15 अक्टुबर, 1793 के दिन नेपोलियन का भाग्य फ्रांस के साथ जुड गया (गैथेल के अनुसार)।
👉🏻 इसी दिन कन्वेशन हॉल को भीड ने घेरा था तथा नेपोलियन द्वारा की गई गोलाबारी से वह फ्रांस के सेनापति बरसि का कृपापात्र बन गया।
👉🏻 1796 में जोनेफाइन ब्यूहार्ने नामक सून्दर विधवा से विवाह कर लिया।
👉🏻 इसके पश्चात् नेपोलियन को आस्ट्रिया तथा पीडमांट के सैनिक अभियानों पर भेजा गया।
👉🏻 पीडमांत को पराजित करके सेवाय तथा नीसू के प्रदेश मिले तथा पराजित आस्ट्रिया ने भी फ्रांस के साथ केन्पोफोमिया की सन्धि की।
👉🏻 मई, 1796 को नेपोलियन मिश्र अभियान पर गया।
👉🏻 काहिरा के युद्ध मे उसने मिश्र सेना को हराया तथा सबसे बड़े व्यापारिक नगर एलेवजेन्ड्रिया पर कब्जा कर लिया।
👉🏻 यहाँ से नेपोलियन सीरिया गया परन्तु इसी समय अंग्रेज सेनापति नेल्सन ने अबूकर की खाड़ी के युद्ध में नेपोलियन की सेना को पराजित किया।
👉🏻 इसी समय आस्ट्रिया तथा इटली ने स्वंय को फ्रांस से आजाद कर लिया यह डायरेक्ट्री की पराजय मानी गई।
👉🏻 नेपोलियन सीरिया से फ्रांस की ओर चला जहाँ पूरी फ्रांसीसी जनता ने उसका दिल खोलकर स्वागत किया।
👉🏻 1799 में फ्रांस में नये संविधान का निर्माण किया गया।
👉🏻 डायरेक्ट्री के स्थान पर समस्य बागडोर कौसल के हाथ में आ गई।
👉🏻 प्रथम कौसल नेपोलियन स्वयं था, द्वितीय केम्बेसरी तथा तृतीय कौसल लेबून के अधीन बनी।
👉🏻 1801 ई में फ्रांस ने ओस्ट्रिया से इटली की सेनाओं को हराया तथा आस्ट्रिया के साथ ल्यूनविले की सन्धि की।
👉🏻 इंग्लैण्ड भी अपने दीर्घकालीन युद्धों के कारण त्रस्त था तथा उसने फ्रांस के साथ अमीनस की सन्धि (1802) की।
👉🏻 इस समय फ्रांस यूरोप की सबसे बड़ी महाशक्ति बन चुका था।
👉🏻 इसीलिए कहा जाता है, ‘‘फ्रांस को जुकाम होता है तो पूरा यूरोप छीकता है।‘‘
👉🏻 नेपोलियन ने धार्मिक सत्ता को भी चूनौती दे डाली।
👉🏻 इसने 1802 ई में पोप के साथ कान्डकोता की सन्धि की जिससे सारे धार्मिक अधिकार पोप से छीनकर नेपोलियन के हाथ में आ गये।
👉🏻 2 दिसम्बर, 1804 को नेपोलियन ने नेत्रादेमा के गिरिजाघर में स्वयं को राजा घोषित किया।
👉🏻 फ्रांस की जनता ने नेपोलियन के इस कदम का स्वागत किया। अगले ही वर्ष नेपोलियन ने इंग्लैण्ड और ओस्ट्रिया के विरूद्ध युद्ध छेड दिया।
👉🏻 21 अक्टुबर, 1805 को ट्राफल्गर के युद्ध में इंग्लैण्ड के सेनापति नेल्सन के फ्रांस की सेना को हराया तथा फ्रांस ने आस्ट्रिया के युद्ध में आस्ट्रिया तथा प्रशा की संयुक्त सेना को हराया। (France ki Kranti Notes)

👉🏻 नेपोलियन ने बेवजह स्पेन की राजगद्दी में हस्तक्षेप किया।
👉🏻 वहाँ बुर्बो राजवंश का शासन था तथा नेपोलियन ने अपने भाई जोसेफ को वहाँ का शासक घोषित किया।
👉🏻 नेपल्स में अपने बहनोई म्यूरा को राजा बनाया।
👉🏻 19 जुलाई, 1808 को स्पेन के बेलेन नामक स्थान पर लडे़ गये युद्ध में नेपोलियन के सैनिकों की जीवन की प्रथम पराजय हुई।
👉🏻 इसी प्रकार नेपोलियन ने रूस के शासन में भी हस्तक्षेप किया था। इस अभियान में फ्रांस की अधिकांश सैनिक शक्ति नष्ट हो गई फलस्वरूप फ्रांस में भी नेपोलियन का विरोध होने लगा।
👉🏻 30 मार्च, 1815 को लुई गअप् को फ्रांस का राजा घोषित किया गया गया।
👉🏻 नेपोलियन को कौसल के पद से हटा दिया गया।
👉🏻 18 जून, 1815 को नेपोलियन ने फिर से अपना भाग्य आजमाया तथा वाटरलू का युद्ध लड़ा।
👉🏻 अंग्रेज सेनापति वेलिंगटन ने नेपोलियन को परास्त कर दिया तथा नेपोलियन को गिरफ्तार करके ब्रिटेन के अधिकार क्षेत्र के द्वीप हेलेना भेज दिया गया।
👉🏻 5 मई, 1821 को नेपोलियन की उदर रोग के कारण मृत्यु हो गई।

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