समायोजन (Adjustment), कुसमायोजन (Maladjustment)

Adjustment Notes in Hindi PDF, Maladjustmenta Notes in Hindi PDF, Psychology Notes in Hindi PDF, Samayojan Notes, Kusamayojan Notes, Adjustment Maladjustment Notes PDF

समायोजन (Adjustment), कुसमायोजन (Maladjustment)

समायोजन :- शारीरिक व मानसिक संतुलन बनाये रखने की योग्यता समायोजन कहलाती है।

परिभाषाएं :- 

★ गेट्स व अन्य के अनुसार – “समायोजन एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने एवं वातावरण के मध्य संतुलन बनाये रखने के लिए अपने व्यवहार में परिवर्तन करता है।”

★ ऐडलर के अनुसार – “समायोजन श्रेष्ठता प्राप्ति का आधार है।”

★ कोलमैन के अनुसार – “समायोजन तनाव के साथ व्यवहार करने व वातावरण के साथ सुसंगत सम्बन्धों को बनाने का प्रयास है।”

समायोजन (Adjustment) की प्रकृति :- 

  1. समायोजन निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।
  2. समायोजन शारीरिक व मानसिक संतुलन बनाये रखने की योग्यता है।
  3. समायोजन व्यक्ति के व्यवहार तथा वातावरण दोनों में परिवर्तन करता है।
  4. समायोजन एक उपलब्धि है।
  5. समायोजन मनोवैज्ञानिक व शारीरिक दोनों है।

समायोजन (Adjustment) को प्रभावित करने वाले कारक :- 

1. तनाव :- जब कोई व्यक्ति अपने किसी कार्य को समय पर पूरा नही करता है तो उस काम के होने का दिन या समय जैसे – जैसे समीप आता जाता है उस व्यक्ति का तनाव बढ़ने लगता है।

2. दबाव :- जब कोई व्यक्ति अपने परिणाम या मान-सम्मान को लेकर सोचता है तो वह बाह्य वातावरण या लोगों के विचारों से दबाव महसूस करने लगता है ऐसी स्थिति में व्यक्ति का काम मे अवधान नही हो पाता और उसका मन-मस्तिष्क अस्थिर हो जाता है।

दबाव के प्रकार :- दबाव के मुख्य दो प्रकार होते है।

  1. सकारात्मक (यूस्ट्रेस)
  2. नकारात्मक (डिस्ट्रेस)

3. द्वन्द्व (संघर्ष) :- जब व्यक्ति दो अलग-अलग परिस्थितियों में फंस जाता है तब वह मानसिक संघर्ष में आ जाता है और निर्णय नहीं ले पाता है कि क्या करें, क्या नहीं करें।

द्वंद्व की स्थिति में व्यक्ति को अंतिम रूप से किसी एक परिस्थिति को चुनना आवश्यक हो जाता है।

द्वन्द्व के प्रकार :- कुर्त लेविन के अनुसार

  1. उपागम – उपागम द्वन्द्व
  2. परिहार – परिहार द्वन्द्व
  3. उपागम – परिहार द्वन्द्व
  4. बहुउपागम – परिहार द्वन्द्व

4. दुश्चिंता :- जब अचेतन मन की बातें चेतन मन में आ जाती है तो व्यक्ति को पुरानी घटनाएं याद आने लगती है और उसके मन-मस्तिष्क में पैदा हो जाती है। इसे ही दुश्चिंता कहते हैं दुश्चिंता के समय व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता और वह समीपता के प्रयास करता है।

Adjustment Maladjustment Notes PDF

5. भग्नाशा / कुंठा / अवसाद :- जब किसी व्यक्ति को किसी कार्य के होने की पूरी उम्मीद या आशा होती है तब व्यक्ति उसके परिणाम के इंतजार में रहता है परंतु कभी-कभी उसे सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति नहीं होती है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को आशा, उम्मीद टूटने से भग्नासा हो जाती है और वह कुंठित हो जाता है कुंठित व्यक्ति अपने भाग्य को दोष देने लगता है और यह पागलपन की शुरुआत होती है।

भग्नाशा के कारण :- 

(1.) बाह्य कारण :- 

  1. भौतिक वातावरण – बाढ़, भूकम्प, सुनामी
  2. आर्थिक कारण
  3. सामाजिक कारण – रीति रिवाज, परम्पराएं

(2.) आंतरिक कारण :- 

  1. शारीरिक दोष
  2. विरोधी इच्छाएं
  3. नैतिक आदर्श

भग्नाशा की स्थिति में बालक का व्यवहार :- 

  1. एकांतवादी बन जाता है।
  2. रोगग्रस्त होने की बातें करता है।
  3. आत्मसमर्पण कर देना।
  4. पलायन करना / भाग जाना।

★ मनोविज्ञान में समायोजन (Adjustment) के उपाय / विधियां :-

● समायोजन की प्रत्यक्ष विधियां :-

(1) बाधा निवारण :-  जब एक व्यक्ति यह सोचता है कि मेरे कार्यों में कोई बाधा आ रही है तो वह व्यक्ति उस बाधा का निवारण करने के लिए कुछ ऐसे उपाय काम में लेता है जो एक प्रकार से अंधविश्वास के रूप में होते हैं लेकिन इनका उपयोग करने से व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त हो जाती है।  जैसे – छोटे बच्चे को काले मोतियों का नजरिया पहनाना।

(2) मार्ग परिवर्तन :- जब कोई एक व्यक्ति किसी कार्य में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो वह अपना प्रयास करता है और यदि अपने किसी प्रयास में सफल नहीं हो पाता तो वह उस कार्य के लिए कोई दूसरा रास्ता चुनता है और सफलता प्राप्त करता है।  जैसे – स्वाध्याय में सफल नहीं होने पर प्रतियोगी किसी मार्गदर्शक को चुन लेता है।

(3) लक्ष्य प्रतिस्थापन :-  एक व्यक्ति किसी बड़े लक्ष्य को लेकर प्रयास करता है परंतु इसमें सफल नहीं हो पाता है तो वह व्यक्ति उसी प्रकृति का छोटा लक्ष्य अपनाकर समायोजन करते हुए मानसिक शांति को प्राप्त करता है।  जैसे – प्रथम श्रेणी शिक्षक भर्ती में असफल व्यक्ति दितीय श्रेणी शिक्षक बनकर संतोष प्राप्त कर लेता है।

(4) निष्कर्ष या निर्णय लेना :-  जैसे :- एक ही दिन दो परीक्षाएं होने पर प्रतियोगी उस परीक्षा का चुनाव करता है जिसकी तैयारी उसने ज्यादा अच्छी तरह से की हुई है।

●  समायोजन की अप्रत्यक्ष विधियां :-

(1) दमन :- जब एक व्यक्ति अपनी इच्छाओं  का दमन करते हुए समायोजन(Adjustment) स्थापित करता है।  जैसे – एक बीमार व्यक्ति खाने-पीने की कई वस्तुओं से परहेज रखता है।

(2) शमन :- जब एक व्यक्ति पूरी नहीं होने वाली इच्छाओं को भूलने का प्रयास करते हुए समायोजन करता है।

(3) दिवास्वप्न :- जब व्यक्ति को कोई पद या वस्तु हाथ लगने की संभावना नहीं होती है तो उस व्यक्ति के बारे में केवल कल्पना करता है।

(4) नकारना :- जब एक व्यक्ति यह सोचता है कि कोई कार्य या व्यवहार करने में वह सामर्थ्यवान नहीं है तो वह उस कार्य या परिस्थिति को नकार देता है। जैसे – MA की परीक्षा पास नही होने पर प्रतियोगी प्रथम श्रेणी शिक्षक भर्ती को नकार देता है।

(5) शोधन / मार्गंतीकरण / उदात्तीकरण :-  जब कोई सामाजिक व्यवस्था हमें अनुकूल प्रतीत नहीं होती है तो हम उन सामाजिक व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए नवीन प्रकार के व्यवहार को अपना लेते हैं।

(6) प्रक्षेपण :- जब एक व्यक्ति अपनी गलती दूसरों पर आरोपित करते हुए समायोजन का प्रयास करता है तो यह प्रक्षेपण कहलाता है। जैसे – नाच न जाने आंगन टेढ़ा

(7) प्रतिगमन / प्रत्यावर्तन :- जब व्यक्ति गम या अवसाद में होता है तो वह भूतकाल में जाकर ऐसे व्यवहार को अपनाता है जिससे उसका गम दूर हो जाए।

(8) प्रत्यागमन :- जब एक व्यक्ति परिस्थितियों से दूर जाकर समायोजन करता है तो प्रत्यागमन कहलाता है।  यह तीन प्रकार का होता है –

  1.  पलायन :- जब व्यक्ति हमेशा – हमेशा के लिए किसी परिस्थिति से दूर जाकर समायोजन करता है।
  2.  पृथक्करण :- किसी परिस्थिति या विवाद के कारण कुछ समय के लिए परिस्थिति से दूर हो जाना।
  3.  विस्थापन :- जब व्यक्ति किसी के व्यवहार से दु:खी होकर कुछ समय के लिए बातचीत करना बंद कर देता है।

(9) युक्तिकरण / औचित्यस्थापन :- जब एक व्यक्ति को अपना मान-सम्मान गिरते हुए नजर आता है तो वह संबंधित लक्ष्य / कार्य में ही कमी बता देता है।

(10) मनोरचना / प्रतिक्रिया निर्माण :- जब कोई व्यक्ति अपनी मौलिकता से हटकर किसी प्रतिक्रिया का निर्माण करता है।  जैसे – बगुला भगत होना

(11) आत्मीकरण / तादात्मीकरण :-  जब कोई व्यक्ति किसी एक क्षेत्र में बार-बार असफल होता है तो वह अपने आपको उसी प्रकार के किसी दूसरे व्यक्तियों से जोड़कर बताने लगता है।

● क्षतिपूरक विधि या क्षतिपूर्ति :- जब एक व्यक्ति में किसी प्रकार की कोई कमी होती है तो उस कमी की पूर्ति के लिए वह जो उपाय काम में लेता है। क्षतिपूरक विधि दो प्रकार की होती है –

  1. प्रत्यक्ष क्षतिपूर्ति :- व्यक्ति जिस क्षेत्र की कमी होती है उसी क्षेत्र से उसे पूरी करता है।
  2. अप्रत्यक्ष क्षतिपूर्ति :- जब व्यक्ति एक क्षेत्र की कमी दूसरे क्षेत्र से पूरी करता है।

●  आक्रमक उपाय :- जब व्यक्ति क्रोध की स्थिति में होता है तो वह अपने क्रोध को शांत करने के लिए जो उपाय काम में लेता है।  यह दो प्रकार का होता है –

  1.  प्रत्यक्ष आक्रामक उपाय :- मूल वस्तु / व्यक्ति पर ही अपना गुस्सा उतारना।
  2. अप्रत्यक्ष आक्रामक उपाय :- मूल व्यक्ति या वस्तु के स्थान पर दूसरे व्यक्ति या वस्तु पर अपना गुस्सा उतारना। जैसे – पिता द्वारा पिटाई होने पर छोटे भाई की पिटाई करना।

समायोजन में शिक्षक की भूमिका :-

(1) निदानात्मक और उपचारात्मक विधि का प्रयोग

(2) सकारात्मक अभिवृत्ति का विकास करना

(3) प्रेम, सहयोग और सहानुभूति पूर्वक व्यवहार

(4) व्यंग्यात्मक टिप्पणी का प्रयोग न करना

(5) निर्देशन व परामर्श का प्रयोग

(6) विद्यालय का उत्तम वातावरण उत्पन्न करना

Adjustment Maladjustment Notes PDF

★ कुसमायोजित व्यक्ति की विशेषताएं :-

(1) हीनता का भाव, असुरक्षा का भाव

(2) एकांतवासी

(3) आक्रामक व्यवहार करने वाले

(4) हकलाने, तुतलाने वाले

(5) अंगूठा चूसने वाले

(6) नाखूनों को दांतो से कुतरना

(7) विद्यालय से भाग जाना

(8) चोरी करना, झूठ बोलना

★ कुसमायोजन के कारण :-

(1) व्यक्तिगत कारण :-

  1. ग्रंथि विकार
  2. वंशानुक्रम

(2) पारिवारिक कारण :-

  1. पारिवारिक निर्धनता
  2. आवश्यकताओं की पूर्ति न होना
  3. माता-पिता का व्यवहार
  4. माता पिता की मृत्यु हो जाना

(3) सामाजिक कारण :-

  1. जातिवाद
  2. ऊंच-नीच का भेदभाव

(4) विद्यालय संबंधी कारण :-

  1. दोषपूर्ण वातावरण
  2. शिक्षकों का पक्षपातपूर्ण व्यवहार
  3. दोषपूर्ण शिक्षण विधि व पाठ्यक्रम

★ कुसमायोजित बालकों के साथ माता-पिता का व्यवहार :-

  1. मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना
  2. बालक के सामने झगड़ा नहीं करें
  3. बालक की दूसरे बच्चों से तुलना न करें

Adjustment Maladjustment Notes PDF

Download Psychology Notes PDF – Click Here

Rajasthan GK Notes  – Click Here

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Scroll to Top