राजस्थान में 1857 की क्रांति हस्तलिखित नोट्स पीडीएफ | 1857 Revolution In Rajasthan Handwritten Notes
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राजस्थान में 1857 की क्रांति हस्तलिखित नोट्स
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दोस्तों आज हम राजस्थान में 1857 की क्रांति के हस्तलिखित नोट्स की पीडीएफ लेके आये है जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे - RAS, School Lecturer, 2nd Grade, REET, RTET, Patwar, Police, Police SI, ग्रामसेवक, लाइब्रेरियन एवं अन्य सभी परीक्षाओ के लिए बेहद उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। 
इस पीडीएफ को बिल्कुल फ्री में डाउनलोड करने के लिए नीचे पीडीएफ का लिंक दिया गया है जिस पर Click करके पीडीएफ डाउनलोड कर सकते है। 

पीडीएफ नाम - राजस्थान में 1857 की क्रांति हस्तलिखित नोट्स पीडीएफ

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 राजस्थान में 1857 क्रान्ति के समय स्थिति :-
● क्रान्ति के समय भारत के गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग व राजस्थान के ए . जी . जी . जॉर्ज पैट्रिक्स लारेन्स थे ।
● ए . जी . जी . का मुख्यालय अजमेर था ।
● 1857 के समय पॉलिटिकल एजेन्ट - कोटा में पी . ए . मेजर बर्टन - रामसिंह शासक
● पॉलिटिकल एजेन्ट जयपुर - कर्नल ईडन 
● पॉलिटिकल एजेन्ट मारवाड़ - मैक मेसन - तख्तसिंह शासक
● पॉलिटिकल एजेन्ट - मेवाड़ - मेजर शावर्स - स्वरूप सिंह शासक
● पॉलिटिकल एजेन्ट - भरतपुर - मेजर निक्सन - जसवन्त सिंह शासक
● उस समय राजस्थान में 6 सैनिक छावनियाँ थी । जिनमें नसीराबाद , नीमच , देवली , ब्यावर , एरिनपुर , खेरवाड़ा थी।
● राजस्थान में विदोह का प्रस्फुटन : - मेरठ - दिल्ली के सैनिक विद्रोह के समाचार राजस्थान में 19 मई 1857 को मिले , तो राजस्थान के ए . जी . जी . पैट्रिक लॉरेन्स ने यूरोपीय सेना को तत्काल नसीराबाद भेजे जाने के आदेश दिये और स्थानीय नरेशों को कम्पनी को सहयोग देने का अनुरोध किया । इन नरेशों ने कम्पनी को सहयोग व सहायता देने का भरोसा दिया ।

 राजस्थान में क्रान्ति का बिगुल :-
● राजस्थान में क्रान्ति का श्रीगणेश नसीराबाद सैनिक छावनी से हुआ ।
● मेरठ के सैनिक विद्रोह की खबर मिलते ही 28 मई , 1857 ई . को नसीराबाद की 15वीं नेटिव इन्फैन्ट्री के सैनिकों ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की घोषणा कर दी ।
 नोट : - क्रान्ति का श्रीगणेश नसीराबाद से होने के निम्न कारण रहे होंगे -
- नसीराबाद में यूरोपीय सेना को बुलाया जाना भी 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री के सैनिकों में संदेह व अविश्वास का कारण बना ।
- नसीराबाद स्थित 15वीं और 30वीं बंगाल नेटिव इन्फैन्ट्री की उपेक्षा करके बंबई लैसस के सैनिकों को गश्त पर लगाया था । - नसीराबाद के बाद नीमच छावनी में 3 जून 1857 को क्रान्ति का उदय हुआ ।

● मारवाड़ - मारवाड़ के सैनिक को क्रान्ति से अछूत नहीं रहे । उन्होंने भी अंग्रेज अधिकारियों तथा उनकी  व जोश का परिचय दिया तथा सैनिकों ने दिल्ली चलो , माारो फिरंगी के नारे लगाते हुए दिल्ली की ओर प्रस्थान किया ।
● आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध एरिनपुर , डीसा के सैनिकों का साथ दिया ।
● इन्होंने 8 सितम्बर 1857 को बिठौड़ा ( पाली ) के पास अंग्रेज सेना का मुकाबला कर जोधपुर व अंग्रेजों की सम्मिलित सेनाओं को परास्त किया । इसमें जोधपुर का पॉलिटिकल एजेन मॉक मेसन भी मारा गया । मैसन को मारकर क्रांतिकारियों ने उसका सिर आउवा के किले के दरवाजे पर लटका दिया ।
● हार के समाचार प्राप्त करके गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग ने कर्नल होम्स के नेतृत्व में एक विशाल सेना आउवा भेजी ।
● आउवा के ठाकुर कुशालसिंह ने कोठारिया के रावत जोधसिंह के यहाँ जाकर शरण ली थी । अन्त में 1860 में अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा । राजस्थानी लोक गीतों में इस युद्ध को “ गौरों व कालों का युद्ध " भी कहा जाता है ।
● मेजर टेलर की अध्यक्षता में गठित जाँच आयोग ने जाँच पड़ताल पूरी करके नवम्बर 1860 को रिहा कर दिया गया ।
● कोटा भी जन विद्रोह का केन्द्र था । कोटा राजपलटन ने भी विद्रोह कर अंग्रेजी सेना को संघर्ष में पराजित किया ।
● 15 अक्टूबर 1857 को मेहराब खाँ व जयदयाल के नेतृत्व में राज्य की सेना व जनता ने विद्रोह कर कोटा में नियुक्त ब्रिटिश रेजीडेट मेजर बर्टन व उसके दो पत्रों तथा एक चिकित्सक ( सर्जन ) सेल्डर की हत्या कर दी गई तथा बर्टन का सिर काटकर शहर में घमाया गया और राज्य की सत्ता अपने हाथ में ले ली ।
● इस विद्रोह का दमन जनरल राबर्ट्स के नेतृत्व में 30 मार्च 1858 को दबा दिया गया ।
● महाराव रामसिंह को नजरबंद कर दिया गया । 6 माह तक कान्तिकारियों के अधीन रहने के बाद कोटा पुनः महाराव को प्राप्त हो गया ।

पीडीएफ नाम - राजस्थान में 1857 की क्रांति हस्तलिखित नोट्स पीडीएफ

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अन्य तथ्य :-
 ● 1857 के विद्रोह में सर्वप्रथम अंग्रेजों ने राजस्थान में बीकानेर निवासी अमरचन्द बांठिया को फांसी पर लटकाया ।
● बीकानेर के सरदार सिंह एकमात्र ऐसे शासक थे , जिसने अपनी सेना लेकर रियासत के बाहर भी अंग्रेजों की सहायता की थी ।
● महान क्रान्तिकारी तात्या टोपे ने ग्वालियर के विद्रोहियों के साथ जून 1858 को राजस्थान में प्रवेश किया ।
● टोंक के नवाब की सेना ने वजीर खां के नेतृत्व में तात्या टोपे का साथ दिया लेकिन अंग्रेज जनरल रॉबर्टस ने उन्हें भीलवाड़ के निकट पराजित किया ।
● दिसम्बर 1858 में उसने बांसवाड़ा पर अधिकार कर लिया और मेवाड़ होते हुए जयपुर की ओर प्रस्थान किया तथा संघर्ष करते हुए राजस्थान से बाहर चले  गए।
नोट : - 7 अप्रैल 1859 को सिंधिया के अधीनस्थ जागीरदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण ताँत्या टोपे पकड़ा गया ।
विद्रोह की असफलता के कारण :- 
●  राजस्थान के देशी रियासतों के शासकों ने अंग्रेजों के प्रति सहयोग व दासवृत्ति का परिचय दिया ।
● राजस्थान में मारवाड़ , मेवाड़ , जयपुर आदि ने ताँत्या टोपे से असहयोग किया ।
● क्रान्तिकारियों में रणनीति व दक्ष नेतृत्व का अभाव था ।
● 1857 के विद्रोह में व्यापारी , पढ़े लिखे लोगों तथा भारतीय शासकों ने भाग नहीं लिया ।
1857 क्रान्ति के अन्य तथ्य :-
● अजीमुल्ला ने वितुरे ( कानपुर ) में नाना साहब के सब मिलकर विट्रोह को योजना को अंतिम रूप दिया जाना माना जाता है कि इन्होंने क्रान्ति की तिथि 31 मई , 1857 का दिन निश्चित किया था ।



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