राजस्थान की लोक देवियाँ 

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राजस्थान की लोक देवियाँ



1. करणीमाता - 
● देशनोक ( बीकानेर ) :-
● बीकानेर के राठौड़ शासकों की कुल देवी ।
● चूहों वाली देवी के नाम से विख्यात ।
● चूहों को करणीजी के काबे कहा जाता है ।
● चारण लोग चूहों को अपना पूर्वज मानते हैं ।
● इनका जन्म सुवाप गाँव ( जोधपुर ) में चारण जाति के श्री मेहाजी किनिया ( चारण ) के घर हुआ था ।
● जन्म तिथि 20 सितम्बर , 1387 आश्विन शुक्ल पंचमी

2. जीण माता - 
● रलावता ( सीकर ) :-
● हर्ष पहाड़ियों में मंदिर ।
● चौहान वंश की आराध्य देवी ,जिसे प्रतिदिन ढाई प्याले शराब पिलाने का रिवाज है ।
● यहाँ पशुओं की बलि दी जाती हैं ।
● यहाँ इनके भाई हर्षनाथ का मंदिर भी बना हुआ है ।
● जीणमाता के मन्दिर में स्थित मधुमक्खियाँ भंवरा माता के रूप में पूजी जाती है ।
● जीणमाता और हर्ष का वृतान्त ' ' नीमराणा की ख्यात ' ' में भी मिलता है ।
● जीणमाता ने औरंगजेब की सेना का मान मर्दन किया था ।

3. कैला देवी :- 
● करौली की त्रिकूट पहाड़ी पर मन्दिर ।
● करौली के यादव वंश की कुल देवी ।
● भक्तों द्वारा इनकी आराधना में लांगुरिया गीत गाये जाते हैं व लांगुरिया नृत्य भी किया जाता है ।
● गुजरों व मीणाओं को इष्टदेवी हैं ।
● कैलादेवी में बोहरा की छतरी भी स्थित है ।

4 . शीला देवी :- 
● आमेर ( जयपुर ) का सुहाग मन्दिर ।
● कछवाहा वंश की आराध्य देवी ।
● इपकी स्थापना मानसिंह प्रथम ने की थी ।
● मन्दिर में देवी की अष्टभुजी प्रतिमा विराजित है । जो बंगाल के राजा केदार से लाई गई थी ।
● यहाँ चरणामृत में जल व मदिरा मिला कर देते हैं ।

5. जमवाय माता :- 
● जमुवारामगढ़ ( जयपुर )
● यह ढूंढाड़ के कछवाहा वंश की कुलदेवी है ।
● इसे अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है ।

6. आईजी माता :- 
● बिलाड़ा ( जोधपुर )
● रामदेवजी की शिष्या जिसने निम्न वर्ग को ऊँचा उठाने के लिए कार्य किया ।
● इसे आई माता भी कहा जाता है ।
● यह सिरवी समाज की कुल देवी है ।
● इसके दीपक से केसर टपकती है ।
● इसके मन्दिर को दरगाह व थान को बढ़ेर कहा जाता है ।

7. राणी सती :- 
● झुंझुनूं ।
● वास्तविक नाम - नारायणी देवी ।
● अग्रवाल समाज की आराध्य देवी ।
● दादीजी के नाम से प्रसिद्ध ।
● इनके पति का नाम तनधनदास था ।

8 . शीतला माता :- 
● चाकसू ( जयपुर ) में शीलडूंगरी पर मन्दिर
● चेचक की देवी - सैढ़ल माता
● बच्चों की संरक्षिका देवी - महामाई के नाम से विख्यात
● सवारी - गधा
● पुजारी - कुम्हार जाति
● बास्योड़ा का त्योहार मनाया जाता है ।
● ठण्डा खाना खाया जाता है ।
● राजस्थान की एकमात्र देवी जो खण्डित रूप में पूजी जाती है ।
● इसके मंदिर का निर्माण सवाई माधोसिंह द्वारा करवाया गया था ।
● प्रमुख गधा मेला - लूणियावास में लगता है ।

9. स्वांगिया माता :- 
● जैसलमेर के तेमड़ी पर्वत पर मन्दिर ।
● जैसलमेर के भाटी राजवंश की कुल देवी ।
● आवड़ माता के नाम से भी जानी जाती है ।
● सूगन चीड़ी को आवड़ माता ( स्वांगिया माता ) का स्वरूप माना जाता है ।

10. छींक माता :-
● गोपाल जी का रास्ता ( जयपुर ) में मन्दिर
● माघ शुक्ल सप्तमी को इनकी विशेष पूजा की जाती है ।

11. नागणेची माता :- 
●  जोधपुर
● जोधपुर के राठौड़ों की कुल देवी हैं ।
● इनका एक मन्दिर बाड़मेर में भी बना हुआ है ।

12. बाणमाता :- 
 ● उदयपुर
● सिसोदिया वंश की कुल देवी ।

13. सकराय माता :- 
● सकराय , शाकम्भरी ( सीकर )
● खण्डेलवालों की कुलदेवी ।

14. ज्वाला माता :- 
● जोबनेर
● खंगारोतों की कुलदेवी ।

15. सच्चियाँ माता :- 
● ओसियां ( जोधपुर )
● ओसवालों की कुलदेवी ।
●इनका मन्दिर प्रतिद्वारों द्वारा निर्मित माना जाता है ।

16. शाकम्भरी देवी :-
● साँभर ( जयपुर )
● चौहानों की कुलदेवी ।

17. त्रिपुरा सुन्दरी :- 
● तलवाड़ा ( बांसवाड़ा ) ।
● इसे ततराय माता भी कहा जाता है ।

18. दधिमती माता :- 
● गोठ मांगलोद ( नाग़ीर )
●दाधीच ब्राह्मणों की आराध्य देवी ।

19. चौथ माता :- 
●  चौथ का बरवाड़ा ( सवाई माधोपुर )

20. पीपाड़ माता - 
● ओसियां ( जोधपुर )

21. बड़ली माता - 
● आकोला ( चित्तौड़गढ़ )
● बेड़च नदी के किनारे ।

22. आवड़ी माता - 
● निकुम्भ ( चित्तौड़गढ़ )
● लकवे का ईलाज होता है ।

नोट - 
◆ चिरजा - देवी / लोकदेवी के गीत या मंत्र चिरजा कहलाते हैं ।
◆ नावा - गले में बांधी जाने वाली देवी की प्रतिकृति नावा कहलाती है ।

23. नारायणी माता - 
● बरवा डूंगरी ( अलवर ) में मन्दिर स्थित है ।
● मीणा व नाई समाज की कुलदेवी ।
● इसके पुजारी मीणा जाति के हैं ।
● इसका एक मन्दिर कंचनपुर ( सीकर ) में भी बना हुआ है ।

24. भद्राणी माता - 
● भदाणा ( कोटा ) ।
● कोटा के शासकों की कुलदेवी ।
● यहाँ मुठ की चपेट में आये व्यक्ति का इलाज किया जाता है ।

25. तनोटिया माता - 
● तनोट ( जैसलमेर )
● भाटी वंश की  व बी.एस.एफ. के जवानों की कुलदेवी मानी जाती है ।
● इसे थार की वेष्णोदेवी कहा जाता है ।
● सैनिक इस देवी की पूजा करते हैं ।
● इसके मंदिर में पाकिस्तान विजय का प्रतीक विजय स्तम्भ स्थित है ।

26. लोद्रवा / लुद्रवा माता - 
● फलौदी ( जोधपुर )
● कल्लो वंश की कुलदेवी ।
● इन्हें लुटियाला माता या खेजर बेरी राय भवानी भी कहा जाता है ।


अन्य लोक देवियाँ

◆ अम्बिका माता - जगत ( उदयुपर )
◆ अम्बा माता -  उदयपुर
◆ अर्बुदा देवी - माउण्टआबू
◆ हिचकी माता - सनवाड़ ( सवाईमाधोपुर )
◆ राढासैण माता - देलवाड़ा ( उदयपुर )
◆ मंशा माता - चुरू
◆ घोटिया अम्बा - डूँगरपुर
◆ छींछ माता - बांसवाड़ा
◆ खोखरी माता - जोधपुर
◆ विरात्रा माता - विरात्रा ( वाड़मेर )
◆ मोरखाना माता - बीकानेर
◆ हर्षद माता - आभानेरी ( दौसा )
◆ भ्रमर माता - सादड़ी
◆ ऊँटा माता -जोधपुर
◆ तरताई माता - तलवाड़ा ( बांसवाड़ा )
◆ जिलाणी माता - बहरोड़ ( अलवर )
◆ चौधरा माता - भाद्राजन
◆ इन्दरमाता - इन्दरगढ़ ( बूंदी )
◆ हिंगलाज माता - लौद्रवा ( जैसलमेर )
◆ भाँवल माता  - मेड़ता ( नागौर )
◆ जोगणिया माता - भीलवाड़ा
◆ घेवर माता - राजसमन्द
◆ महामाई माता - पाटन ( सीकर ) व रेनवाल ( जयपुर )
◆ आवरी माता - निकुंभ ( चित्तौड़गढ़ )
◆ चारभुजा माता - खमनौर ( हल्दीघाटी )
◆ बिरवड़ा - चित्तौड़गढ़ दुर्ग में
◆ भद्रकाली माता -  अमरपुरा थेहड़ी ( हनुमानगढ़ )
◆ राजेश्वरी माता - भरतपुर
◆ आमजा माता - केलवाड़ा ( उदयपुर )
◆ चारणी देवियाँ - जैसलमेर ( सात देवियाँ )
◆ सच्चिया माता - नागौर
◆ परमेश्वरी माता - कोलायत ( बीकानेर )
◆ सुंडा देवी - सुंदा पर्वत ( भीनमाल )
◆ ब्याई माता - डिगों ( दौसा )