लैंगिक संवेदनशीलता | Gender Sensitivity

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लैंगिक संवेदनशीलता | Gender Sensitivity

👉🏻 “लैंगिक असमानता का तात्पर्य लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव से है. पारंपरागत रूप से समाज में महिलाओं को कमज़ोर वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है. वे घर और समाज दोनों जगहों पर शोषण, अपमान और भेद-भाव से पीड़ित होती हैं. महिलाओं के खिलाफ भेदभाव दुनिया में हर जगह प्रचलित है.”
👉🏻 लिंग असमानता को सामान्य शब्दों में इस तरह परिभाषित किया जा सकता हैं कि, लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव। समाज में परम्परागत रुप से महिलाओं को कमजोर जाति-वर्ग के रुप में माना जाता हैं।
👉🏻 प्राचीन काल मे महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत बेतहर थी। सिंधु घाटी सभ्यता में तो मातृ शक्ति की पूजा की जाती थी। ऋग्वैदिक काल मे महिलाओं को विशेषाधिकार प्राप्त थे। उनकी शिक्षा दीक्षा पर पूर्ण ध्यान दिया जाता था। लेकिन मौर्य काल के बाद में समाज मे धीरे-धीरे स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आती गई। अब उनका मुख्य कार्य विवाह कर पति की सेवा करना एवं सन्तानोतप्ति करना माना जाने लगा। इस काल मे स्त्रियों को सम्पति के अधिकार से वंचित रखने कि प्रवृति प्रारम्भ हो चुकी थी।

भारतीय समाज मे स्त्रियों के सम्बंध में प्रचलित दुष्प्रथाएँ

1.सती प्रथा :- पति की मृत्यु हो जाने पर पत्नी द्वारा उसके शव के साथ चिता में जलकर मृत्यु को वरण करना ही सती प्रथा कहलाती है। राजस्थान में सर्वप्रथम 1822 ई. में बूंदी रियासत में सती प्रथा को गैर कानूनी घोषित किया गया। बाद में राजा राममोहन राय के प्रयत्नों से लार्ड विलियम बेंटिक ने 1829 ई. में सरकारी अध्यादेश से इस प्रथा पर रोक लगाई। सती प्रथा को सहमरण, सहगमन भी कहा जाता है।

2.जौहर प्रथा :- युद्ध के हारने पर शत्रु से अपने शील-सतीत्व की रक्षा हेतु वीरांगनाएँ दुर्ग में अग्निकुंड में कूदकर सामूहिक आत्मदाह कर लेती है। राजस्थान में सर्वप्रथम जौहर करने के प्रमाण रणथंभौर दुर्ग के है।

3.कन्या वध :- कन्या के जन्म लेते ही अफीम देकर या गला दबाकर मार दिया जाता था। यह मुख्यतः राजपूतों में प्रचलित थी। हाड़ोती के पॉलिटिकल एजेंट विलकिंसन के प्रयासों से लार्ड विलियम बैंटिक के समय सर्वप्रथम कोटा राज्य में 1933 में एवं बूंदी राज्य में 1834 ई. में कन्या वध को गैर कानूनी घोषित कर दिया गया।

4.बाल विवाह प्रथा :- छोटी उम्र में ही विवाह कर देने की प्रथा है। अजमेर के हरविलास शारदा ने 1929 ई. में बाल विवाह निरोधक अधिनियम प्रस्तावित किया। इस शारदा एक्ट के नाम से भी जाना जाता है। यह 1 अप्रैल 1930 को सम्पूर्ण देश मे लागू हुआ। विधवा विवाह :- मध्यकाल से ही स्त्री की विधवा होने पर उसका जीवन बड़ा कष्टसाध्य और असहनीय हो जाता है। लार्ड डलहौजी ने स्त्रियों को इस दुर्दशा से मुक्ति प्रदान करने हेतु 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बनाया।

लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने व महिला विकास हेतु कार्यक्रम

1.चिराली योजना :- महिलाओं में जागरूकता लाने की दृष्टि से 26 सितम्बर 2017 को राजस्थान के सात जिलों (बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा, जालोर, झालावाड़, नागौर, प्रतापगढ़ व बूंदी) में लागू की गई।

2.सेनेटरी नैपकिन डिस्पेंसर मशीन :- 15 मार्च 2017 को श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर व पदमपुर में सेनेटरी नैपकिन मशीन लगाई गई। सर्वप्रथम यह मशीन जून 2016 में अजमेर के राजकीय जनाना अस्पताल में लगाई गई।

3.महिला उद्यमियों के लिए ‘उद्यम सखी पोर्टल’ का शुभारंभ :- 8 मार्च 2018 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से भारतीय महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए इस पोर्टल को शुरू किया गया।

4.राजश्री योजना :- 1 जून 2016 से मुख्यमंत्री शुभ लक्ष्मी योजना के स्थान पर राजश्री योजना प्रारंभ की गई इस योजना में बालिका को जन्म से लेकर बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने तक अलग-अलग किस्तों में ₹50000 की राशि दी जाएगी।

5.बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान :- 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरूआत पानीपत हरियाणा से की।

6.कन्या सुरक्षा स्तंभ :- जयपुर में सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय में कन्या सुरक्षा स्तंभ स्थापित किया गया है इसका शुभारंभ 4 जुलाई 2017 को किया गया।

7.विधवा पुनर्विवाह उपहार योजना :- राज्य की विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह को प्रोत्साहन देने के लिए 1 अप्रैल 2017 से विधवाओं के पुनर्विवाह पर राज्य सरकार की ओर से उपहार स्वरूप ₹15000 की राशि दी जा रही थी 1 अप्रैल 2016 से यह राशि ₹30000 कर दी गई।

8.राज्य का पहला संपूर्ण महिला थाना :- 8 मार्च 2017 को गांधीनगर जयपुर में राजस्थान के पहले संपूर्ण महिला थाने का उद्घाटन किया गया।

9.सुकन्या समृद्धि योजना :- इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा से की गई राजस्थान में यह योजना 4 फरवरी 2015 से शुरू हुई।

10.राजीव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना :- इस योजना का मुख्य उद्देश्य 11 से 18 वर्ष की बालिकाओं के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ ही स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना शिक्षा से जोड़ना , बालिकाओं को स्वावलंबी बनाना है

11.उज्जवला योजना :- इस योजना की शुरुआत 4 दिसंबर 2007 से की गई

12.दहेज निषेध अधिनियम 1961 :- राज्य सरकार द्वारा 19 जुलाई 2004 से राजस्थान दहेज प्रतिषेध अधिनियम 2004 लागू किया जा चुका है।

13.राज्य बालिका नीति :- राजस्थान राज्य बालिका नीति का राष्ट्रीय बालिका दिवस 24 जनवरी 2013 को विमोचन किया गया बालिका नीति जारी करने वाला देश का पहला राज्य है इसका उद्देश्य बालिका को एक सकारात्मक वातावरण प्रदान करना जो उसको भेदभाव रहित गरिमा पूर्ण जीवन जीने और उसकी विकास आरक्षण तथा भागीदारी को सुनिश्चित करें।

14.महिला बैंक :- जयपुर में 13 मार्च 2014 को भारतीय महिला बैंक की शाखा स्थापित की गई

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