भक्ति आंदोलन नोट्स | Bhakti Movement Notes

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भक्ति आंदोलन नोट्स | Bhakti Movement Notes: भारतीय इतिहास की इस पोस्ट में भक्ति आन्दोलन से संबंधित नोट्स एवं महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवा रहे है जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है

भक्ति आंदोलन नोट्स | Bhakti Movement Notes

👉🏻 दक्षिणी भारत का आर्यकरण ऋषि अगस्त्य द्वारा किया गया अन्यथा भारत के इस क्षेत्र में द्रविड़ नामक जाति निवास करती थी।
👉🏻 भक्ति आंदोलन को दो चरणों में बांटा जाता है।
1.सांतवी से तेरहवी शताब्दी तक 2.तेरहवी से सोलहवी शताब्दी तक
👉🏻 यह भक्ति आंदोलन सर्वप्रथम दक्षिणी भारत में शुरू हुआ क्योंकि उत्तरी भारत के जैन व बोद्ध धर्म इस समय दक्षिणी भारत में भी फैलने लगे थे।
👉🏻 भक्ति आन्दोलन का प्रारम्भ सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच दक्षिण भारत में अलवार संतों (वैष्णव भक्त) द्वारा किया गया ।
👉🏻 भक्ति आन्दोलन हिन्दुओं का सुधारवादी आन्दोलन था
👉🏻 भक्ति आन्दोलन का विकास 12 अलवार वैष्णव संतों और 63 नयनार संतों ने किया । अलवार वैष्णव अनुयायी थे जबकि नयनार शैव धर्मानुयायी थे ।
👉🏻 दक्षिणी भारत के आंदोलन का जन्मदाता शंकराचार्य को माना जाता है।
👉🏻 ये बौद्ध धर्म की महायान शाखा से प्रभावित थे इसीलिए इन्हें प्रच्छन्न बुद्ध कहा जाता है।
👉🏻 ये अद्वेतवाद के समर्थक थे।
👉🏻 इन्हे भारत में 4 पीठे स्थापित करने का श्रेय है-
1. ज्योतिष पीठ – बद्रीनाथ (उत्तराखंड)
2. गोवर्धन पीठ- पुरी उड़ीसा
3. शृंगेरी पीठ – दक्षिण (कर्नाटक) तुंगभद्रा नदी के तट पर
4. शारदा/द्वारिका पीठ – द्वारिकापुरी (गुजरात)

👉🏻 इसके द्वारा अद्धेतवाद मत का प्रतिपादन किया गया जिनके अनुसार ब्रह्म ही सत्य है तथा जगत को इन्होनें मिथ्या कहा।
👉🏻 शंकराचार्य के अद्वैतदर्शन के विरोध में दक्षिण में वैष्णव संतों ने चार मतों की स्थापना की गई –

  1. श्री संप्रदाय – रामानुजाचार्य – विशिष्टाद्वैतवाद
  2. ब्रह्म संप्रदाय – मध्वाचार्य – द्वैतवाद
  3. सनक संप्रदाय – निम्बकाचार्य – द्वैताद्वैतवाद
  4. रुद्र संप्रदाय – वल्लभाचार्य विष्णुस्वामी – शुद्धाद्वैतवाद

👉🏻 भक्ति का सर्वप्रथम उल्लेख श्वेताशवर उपनिषद में मिलता है ।
👉🏻 भक्ति आन्दोलन को मौन क्रांति के नाम से भी जाना जाता है ।
👉🏻 निर्गुण भक्ति – ईश्वर निराकार है व ईश्वर को किसी भी नाम से संबोधित नहीं किया जा सकता ।
👉🏻 सगुण भक्ति – जो ईश्वर का निश्चित आकार मानते थे व उसे किसी नाम से संबोधित करते थे ।
👉🏻 निर्गुण संत – कबीर, नानक, दादूदयाल
👉🏻 सगुण संत – रामानुज, रामानंद, निम्बार्क, चैतन्य

रामानुजाचार्य

👉🏻 जन्म – 1017 ई. में आंध्रप्रदेश के तिरुपति नगर में
👉🏻 इन्होनें विशिष्ट अद्वेतवाद वाद मत का समर्थन किया जिनके अनुसार ब्रह्म ईश्वर का रूप होता है तथा ईश्वर को भक्ति के माध्यम से ही पाया जा सकता है।
👉🏻 इस दर्शन में राम को परब्रह्म मानकर उसकी पूजा-आराधना की जाती है ।
👉🏻 सगुण भक्ति का यह मार्ग प्रपत्ति मार्ग कहलाता है।
👉🏻 रामानुजाचार्य द्वारा ‘श्री सम्प्रदाय‘ स्थापित किया गया था।
👉🏻 इन्होंने संस्कृत में श्री भाष्य पुस्तक लिखी जिसमें भक्ति सिद्धांतों की व्याख्या की
👉🏻 गुरु – यादव प्रकाश

निम्बार्काचार्य

👉🏻 ये रामानुज के समकालीन थे तथा ये तैलंगाना के निवासी थे ।
👉🏻 निम्बार्क कृष्ण के उपासक थे ।
👉🏻 इनके द्वारा सनकादि सम्प्रदाय की स्थापना की गई।
👉🏻 इन्हें सुदर्शन चक्र का अवतार माना जाता है।
👉🏻 इनके द्वारा द्वेताद्वेतवाद मत का सम्पादन किया गया।
👉🏻 इन्होनें राधा को कृष्ण की पत्नी के रूप में स्वीकार किया है तथा वेदांत पारिजात सौरभ नामक पुस्तक की रचना की।
👉🏻 निम्बार्क संप्रदाय की पीठ सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है ।
👉🏻 इनके द्वारा प्रतिपादित यह वैष्णव दर्शन ‘हंस संप्रदाय’ के नाम से भी जाना जाता है

माधवाचार्य

👉🏻 इनका जन्म 1199 में कन्नड जिले के उडिपी नगर में हुआ ।
👉🏻 इनके द्वारा प्रतिपादित संप्रदाय गौड़ीय संप्रदाय कहलाया ।
👉🏻 इसके द्वारा ब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की गई।
👉🏻 इन्हें आनन्द तीर्थ पूर्ण बोध व पूर्ण प्रज्ञ के नाम से भी जाना जाता है।
👉🏻 इन्होनें द्वैतवाद मत का समर्थन किया था तथा बताया कि जीव का ब्रह्म से मिलन ज्ञान की कमी के कारण नहीं हो पाता तथा इसका एकमात्र माध्यम भक्ति ही है। (भक्ति आंदोलन)
👉🏻 यह दर्शन भागवत व विष्णु पुराण से लिया गया है।
👉🏻 इन्होंने शंकर और रामानुज दोनों के मतों का विरोध किया ।

रामानंद

👉🏻 इनका जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) में हुआ था ।
👉🏻 इन्होंने अपने उपदेश संस्कृत के स्थान पर हिन्दी में दिए ।
👉🏻 इनके द्वारा रामानंदी सम्प्रदाय की स्थापना की गई।
👉🏻 इन्हें उत्तरी भारत का भक्ति आंदोलन का जनक माना जाता है।
👉🏻 वैष्णव धर्म में रामानुज के बाद पांचवे गुरू थे।
👉🏻 इनके 12 प्रमुख शिष्य थे जिनमें पद्मावती व सुरसीर महिलाए थी।
👉🏻 इन्होनें सबसे पहले भक्ति मार्ग में हिन्दी भाषा का प्रयोग किया था।
👉🏻 रामनंद ने समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊँच-नीच, आदि को समाप्त कर समाज के सभी तत्वों को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया ।
👉🏻 कबीर, धन्नाजी, पिपाजी, सदनाजी, रैदास आदि इनके प्रमुख शिष्य थे ।
👉🏻 रामनंद की भक्ति दास्य भाव की थी ।

कबीर

👉🏻 कबीर का अर्थ महान होता है
👉🏻 इनका जन्म 1440 ई. में एक विधवा ब्रह्मणी के माना जाता है ब्राह्मणी ने नवजात शिशु को वाराणसी में एक तालाब में छोड़ दिया तथा जुलाहा नीरू व उसकी पत्नी नीमा ने इस शिशु का लालन-पालन किया ।
👉🏻 सिकन्दर लोदी के समकालीन थे तथा इनके गुरू का नाम रामनंद था।
👉🏻 ये हिन्दू – मुस्लिम एकता के हिमायती थे ।
👉🏻 कबीर द्वारा स्थापित पंथ – कबीर पंथ कहलाया ।
👉🏻 कबीर की शिक्षाएं “बीजक” ग्रंथ में संकलित है जो गोपालदास द्वारा संकलित है ।
👉🏻 कबीर के तीन प्रमुख शिष्य थे – भागोदास, धर्मदास, गोपालदास ।
👉🏻 कबीर ने निराकार ब्रह्म की उपासना को महत्व दिया ।
👉🏻 कबीर के उपदेश सबद सिक्खों के आदि ग्रंथ में संगृहीत है ।
👉🏻 बंगाल में वैष्णव धर्म का प्रसार गौरांग महाप्रभु चेतन्य ने किया था।
👉🏻 गुजरात के नरसी मेहता ने गांधी जी के प्रिय भजन ‘वेष्णव जन‘ को लिखा था।
👉🏻 तुलसीदास अकबर के समकालीन थे तथा रामचरित मानस के माध्यम से भक्ति मार्ग को बढ़ावा दिया।

गुरुनानक

👉🏻 गुरूनानक का जन्म 1469 में तलवंड़ी (पाक) में हुआ। इन्होनें सिख धर्म का प्रतिपादन किया तथा मक्का से मदीना की यात्रा भी की थी।
👉🏻 गुरुनानक कबीर के समकालीन थे ।
👉🏻 गुरुनानक निर्गुण संत थे ।
👉🏻 ये कबीर की भांति मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा तथा धार्मिक आडंबरों के कट्टर विरोधी थे ।
👉🏻 गुरुनानक के उपदेशों की भाषा “गुरुमुखी” (पंजाबी) थी ।
👉🏻 नानक ने कीर्तनों के माध्यम से उपदेश दिए ।
👉🏻 नानक ने भारत देश का पाँच बार चक्कर लगाया जिसे “उदासीस” कहा जाता है ।
👉🏻 1539 में करतापुर में इनकी मृत्यु हो गई थी।
👉🏻 नानक ने सिक्ख धर्म की स्थापना की ।
👉🏻 सिक्खों के 58 वें गुरु अर्जुनदेव ने नानक के उपदेशों का संकलन किया, जिसे “गुरुग्रंथ साहिब” या “आदिग्रंथ” कहा जाता है ।
👉🏻 दक्षिणी भारत में वैष्णव संत अलवार तथा शैव संत नयनार कहलाते थे।
👉🏻 अण्डाल नामक महिला प्रमुख अलवार संत थी।
👉🏻 अबुल फजल के अनुसार कुल सिलसिलों की संख्या 14 थी।

वल्लभाचार्य

👉🏻 इनका जन्म 1479 ई. में वाराणसी में हुआ ।
👉🏻 वल्लभाचार्य श्रीनाथ जी के नाम से भगवान कृष्ण की पूजा करते थे ।
👉🏻 वल्लभाचार्य पुष्टिमार्ग व भक्ति मार्ग में विश्वास करते थे ।
👉🏻 वल्लभाचार्य ने “अणुभाष्य” लिखकर ‘शुद्धाद्वैत’ दर्शन का प्रतिपादन किया।
👉🏻 इन्होंने वृंदावन में ‘श्रीनाथ’ मन्दिर की स्थापना की ।
👉🏻 इनके प्रमुख ग्रंथ – सुबोधिनी, सिद्धांत रहस्य

चैतन्य

👉🏻 इनका वास्तविक नाम विश्वम्भर था ।
👉🏻 चैतन्य को बंगाल में वैष्णव धर्म का संस्थापक माना जाता है ।
👉🏻 चैतन्य ने महागौडिय सम्प्रदाय या अचिंत्य भेदाभेद संप्रदाय की स्थापना की।
👉🏻 चैतन्य को गौरांगमहाप्रभु के नाम से भी जाना जाता है ।
👉🏻 इनके गुरु ईश्वरपुरी, पिता – जगन्नाथ मिश्र व माता सचीदेवी थे ।

मीरा बाई

👉🏻 इनका जन्म 1498 ई. में मेड़ता (नागौर) के कुड़की नामक ग्राम में हुआ ।
👉🏻 ये 16 वीं शताब्दी में भारत की महान महिला संत थी ।
👉🏻 इनका विवाह सांगा के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज के साथ हुआ ।
👉🏻 मिरां कृष्ण की उपासक थी तथा राजस्थान में कृष्ण भक्ति को फैलाया ।
👉🏻 मिरां ने राजस्थानी व ब्रजभाषा में गीतों की रचना की ।
👉🏻 मिरां के कहने पर रत्ना खाती ने “नरसी जो रो मायरो” की रचना की ।

सूरदास

👉🏻 इनका जन्म रुनकता नामक ग्राम में हुआ ।
👉🏻 ये अकबर व जहांगीर के समकालीन थे ।
👉🏻 इन्होंने सगुण भक्ति के माध्यम से भगवान कृष्ण व राधा की भक्ति की ।
👉🏻 इन्होंने ब्रजभाषा में तीन ग्रंथों की रचना की – सुरसागर, सुरसावली, साहित्य लहरी की रचना की ।

तुलसीदास जी

👉🏻 इनका जन्म बांदा जिले के राजापुर नामक ग्राम में हुआ ।
👉🏻 ये मुगल शासक अकबर के समकालीन थे ।
👉🏻 इन्होंने 1574-75 ई. में रामचरितमानस की रचना की ।
👉🏻 ये राम भक्त थे ।
👉🏻 तुलसीदास संत नरहरीदास के शिष्य थे ।
👉🏻 इन्होंने सगुण भक्ति का प्रचार कर राम भक्ति का प्रचार किया ।
👉🏻 इनकी प्रमुख रचनाएं – गितावली, कवितावली, विनयपत्रिका, बरवै रामायण आदि ।
👉🏻 रामचरित मानस की रचना अवधि भाषा में हुई ।

संत धन्ना

👉🏻 इनका जन्म टोंक जिले के घुवन ग्राम में एक जाट परिवार में हुआ ।
👉🏻 ये संत रामनंद से दीक्षा लेकर धर्मोपदेश एवं भगवत भक्ति का प्रचार करने लगे।
👉🏻 ये निर्गुण संत थे ।

रैदास (रविदास)

👉🏻 इन्होंने रामदासी संप्रदाय की स्थापना की ।
👉🏻 ये रामानंद के प्रसिद्ध शिष्य थे ।
👉🏻 मीरा बाई रैदास की शिष्या थी ।
👉🏻 सिक्खों के ग्रंथ – गुरुग्रंथ साहिब में रैदास के 30 से अधिक भजन संग्रहीत है ।
👉🏻 इनके उपदेश “रैदास की परची” ग्रंथ में है ।
👉🏻 इन्होंने समाज में व्याप्त आडंबरों एवं भेदभाव का विरोध कर निर्गुण ब्रह्म की भक्ति का उपदेश दिया ।

दादूदयाल

👉🏻 दादूदयाल का जन्म अहमदाबाद मे एक जुलाहा परिवार में हुआ ।
👉🏻 दादू ने ब्रह्म सम्प्रदाय व परब्रह्म सम्प्रदाय की स्थापना की ।
👉🏻 कथन – “ईश्वर के सम्मुख सभी स्त्री-पुरुष, भाई-बहिनों की भांति है” ।
👉🏻 दादू की शिक्षा – “विनयशील बनो तथा अहम से मुक्त रहो” ।
👉🏻 अकबर ने दादू को धार्मिक चर्चा के लिए फतेहपुर सीकरी भी बुलाया था ।
👉🏻 दादू दयाल के गुरु बुद्धानंद थे ।
👉🏻 दादू की प्रमुख पीठ नरैणा और नरायणा (जयपुर) में स्थित है ।
👉🏻 इनके प्रमुख उपदेश दादू दयालरी वाणी और दादू दयाल रा दुहा ग्रंथ में संकलित है ।
👉🏻 इनके प्रमुख शिष्य – सुंदरदास, रज़्जब
👉🏻 इन्होंने एक असाम्प्रदायिक मार्ग (निपख संप्रदाय) का उपदेश दिया ।

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भक्ति आंदोलन

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