प्रत्यय (Suffix) नोट्स | Pratyay in Hindi

प्रत्यय Pratyay in Hindi: हिन्दी व्याकरण की इस पोस्ट में प्रत्यय (Suffix) नोट्स की पीडीएफ़ फाइल उपलब्ध करवाई गई है जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है प्रत्यय नोट्स की इस पीडीएफ़ को डाउनलोड करने के लिए नीचे लिंक दिया गया है जिस पर क्लिक करके पीडीएफ़ डाउनलोड कर सकते है

प्रत्यय (Suffix) नोट्स | Pratyay in Hindi

कृत प्रत्यय – क्रिया/धातु – कृदन्त शब्द
तद्धित प्रत्यय – शब्द के साथ – तद्धितान्त शब्द
» प्रत्यय दो शब्दों से बना है- प्रति+अय। ‘प्रति’ का अर्थ ‘साथ में, ‘पर बाद में’ है और ‘अय’ का अर्थ ‘चलनेवाला’ है। अर्थात ‘प्रत्यय’ का अर्थ है ‘शब्दों के साथ, पर बाद में चलनेवाला या लगनेवाला।
» प्रत्यय भी एक शब्दांश मात्र होता है ऐसा शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में जुड़कर नए शब्द की रचना करते है एवं मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते है प्रत्यय कहलाते है
जैसे – समाज + इक – सामाजिक

प्रत्यय के भेद

हिंदी में प्रयुक्त होने वाले प्रत्ययों को मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है –

  • कृत् प्रत्यय (कृदन्त) (Agentive)
  • तद्धित प्रत्यय (Nominal)

1. कृत् प्रत्यय(Agentive)

 ऐसे प्रत्यय जो किसी धातु (क्रिया) के साथ जोड़े जाते है के कृत प्रत्यय कहलाते है। कृत प्रत्यय के योग से बना शब्द कृदन्त शब्द कहलाता है जैसे –

धातु/क्रिया + कृत प्रत्यय – कृदन्त शब्द
लिख् + अक – लेखक
वच् + ता – वक्ता
लूट (ना) + एरा – लुटेरा
बच (ना) + अत – बचत
श्रु + ता – श्रोता

2. तद्धित प्रत्यय

ऐसे प्रत्यय जो किसी संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण/अव्यय शब्दों के साथ जोड़े जाते है वे तद्धित प्रत्यय कहलाते है तद्धित प्रत्यय के योग से बना शब्द तद्धितान्त शब्द कहलाता है जैसे –

शब्द + तद्धित प्रत्यय – तद्धितान्त शब्द
मनु + अ – मानव
युवा + अन – यौवन
अपना + त्व – अपनत्व
एक + ता – एकता

प्रत्ययों के भेद :-

कृत प्रत्यय के भेद :-

कृत प्रत्यय के पाँच भेद होते है –

  • कर्तृवाचक कृत प्रत्यय
  • कर्मवाचक कृत प्रत्यय
  • करणवाचक कृत प्रत्यय
  • भाववाचक कृत प्रत्यय
  • क्रियावाचक कृत प्रत्यय

1. कर्तृवाचक प्रत्यय

कृत प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि वाक्य में कर्ता कारक के रूप में प्रयुक्त होता है तो वहाँ कर्तृवाचक प्रत्यय होता है जैसे –

  • लुटेरा लूट मचा रहा है (लूट + एरा – कर्ता कारक)
  • लेखक ने अच्छा लेख लिखा है (लिख + अक – कर्ता कारक)

2. कर्मवाचक कृत प्रत्यय

कृत प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि वाक्य में कर्म कारक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है तो वहाँ पर कर्मवाचक कृत प्रत्यय माना जाता है जैसे –

बच्चे ने खिलौने को तोड़ दिया (खेल + औना – कर्मकारक)
राधा ने बेलन को फैंक दिया (बेल(ना) + अन – कर्मकारक)

3. करणवाचक कृत प्रत्यय

कृत प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि वाक्य में करण कारक के रूप में प्रयुक्त होता है तो वहाँ करणवाचक कृत प्रत्यय माना जाता है जैसे –

बच्चा खिलौने से खेल रहा है (खेल (ना) + औना – करण कारक)
राधा बेलन से रोटियाँ बेल रही है (बेल (ना) + अन – कारणकारक)

4. भाववाचक कृत प्रत्यय

कृत प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि भाववाचक संज्ञा को प्रकट करता है तो वहाँ भाववाचक कृत प्रत्यय माना जाता है जैसे –

घबरा (ना) + आहट – घबराहट
मिल (ना) + आवट – मिलावट
काट (ना) + आई – कटाई

5. क्रियावाचक कृत प्रत्यय

जब किसी क्रिया के साथ हुआ/हुई/हुए शब्दांश जोड़ दिए जाते है तो वहाँ क्रियावाचक कृत प्रत्यय माना जाता है

यदि किसी क्रिया के साथ ना शब्दांश का प्रयोग हो रहा हो एवं वह शब्द वाक्य में क्रियार्थक हो तो वहाँ ना शब्दांश में क्रियावाचक कृत प्रत्यय माना जाता है (प्रत्यय Pratyay in Hindi)  जैसे –

बालक रोता हुआ आया|
बच्चे भागते हुए आए|
पीना एक बुरी आदत है

तद्धित प्रत्यय के भेद

हिन्दी मे 6 प्रकार के तद्धित प्रत्यय है –

(1) कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
(2) भाववाचक तद्धित प्रत्यय
(3) संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय
(4) अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय
(5) स्त्रीवाचक तद्धित प्रत्यय
(6) ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय

(1) कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय

 तद्धित प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि वाक्य में कर्ता कारक के रूप में प्रयुक्त होता है तो वहाँ कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय माना जाता हैं। जैसे-

तेली तेल निकालता है (तेल + ई – कर्ता कारक)
माली माला गूँथ रहा है (माला + ई – कर्ता कारक)

(2) भाववाचक तद्धित प्रत्यय

 तद्धित प्रत्यय से बना कोई शब्द यदि भाववाचक संज्ञा को प्रकट करता है वहाँ भाववाचक तद्धित प्रत्यय माना जाता है। जैसे –

महात्मा + य – महात्म्य
अमीर + ई – अमीरी
मधुर + य – माधुर्य
अच्छा + आई – अच्छाई
बच्चा + पन – बचपन

(3) संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय

तद्धित प्रत्यय से बना हुआ कोई शब्द यदि मूल शब्द से किसी संबंध को प्रकट करता है तो वहाँ संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय माना जाता है (प्रत्यय Pratyay in Hindi) जैसे –

भारत + ईय – भारतीय
इतिहास + इक – ऐतिहासिक
समाज + इक – सामाजिक
ननद + ओई – ननदोई
बहन + ओई – बहनोई

(4) अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय

अपत्य का शाब्दिक अर्थ होता है संतान अर्थात ऐसे प्रत्यय जो किसी पदार्थ से उत्पन्न होने के अर्थ को प्रकट करते है तो वहाँ अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय माना जाता है जैसे –

मनु + अ – मानव
पाण्डु + अ – पाण्डव
सिन्धु + अ – सैन्धव
जनक + ई – जानकी
पंक + ज – पंकज
अग्नि + एय – आग्नेय

(5) उन्नतावाचक तद्धित प्रत्यय

उन्नता का शाब्दिक अर्थ होता है हीन/कमजोर होना| अर्थात यदि किसी तद्धित प्रत्यय के जुडने से कोई शब्द बड़े आकार से छोटे आकार को प्रकट करने लगता है
अथवा
यदि किसी शब्द में प्रत्यय के जुडने से अधिक प्रेम/माधुर्य का भाव प्रकट होता है तो वहाँ पर भी उन्नतावाचक प्रत्यय माना जाता है जैसे –

मुख + ड़ा – मुखड़ा
मण्डल + ई – मण्डली
छुरा + ई – छूरी
खाट + ओला – खटोला
कालु + उआ – कलुआ

(6) स्त्रीवाचक तद्धित प्रत्यय

यदि किसी तद्धित प्रत्यय के जुडने से कोई शब्द पुल्लिंग से स्त्रीलिंग बन जाता है तो वहाँ स्त्रीवाचक तद्धित प्रत्यय माना जाता है (प्रत्यय Pratyay in Hindi) जैसे –

सूत + आ – सुता
चटक + आ – चटका
कुमार + ई कुमारी
भुजंग + ई – भुजंगी
कमल + इनी – कमलिनी
सर्प + इनी – सर्पिणी
सेठ + आनी – सेठानी

प्रत्यय की पहचान करने के नियम

1. किसी भी शब्द में सही प्रत्यय की पहचान करने के लिए सर्वप्रथम उसके मूल शब्द को अलग कर देना चाहिए एवं शेष शब्दांश को प्रत्यय मान लेना चाहिए जैसे –

शीतल – शीत + ल
बीकानेर – बीका + नेर
पयोधि – पयः + धि
लालिमा – लाल + इमा
उदयपुर – उदय + पुर

2. यदि किसी शब्द के अंत में ‘य’ लिखा हुआ हो एवं उससे भी पहले कोई आधा अक्षर लिखा हुआ हो तो वहाँ ‘य’ प्रत्यय माना जाता है जैसे –

शौर्य – शूर + य
धैर्य – धीर + य
सौजन्य – सुजन + य

3. यदि किसी शब्द में य वर्ण लिखा हुआ है परंतु य से ठीक पहले कोई आधा अक्षर नहीं तो तो वहाँ मूल शब्द/धातु अलग करके शेष अंश को प्रत्यय मान लेना चाहिए जैसे –

भारतीय – भारत + ईय
राष्ट्रीय – राष्ट्र + ईय
दर्शनीय – दर्शन + अनीय
स्मरणीय – स्मृ + अनीय

4. यदि किसी शब्द के अंत में व वर्ण लिखा हुआ हो एवं वह शब्द किसी से उत्पन्न होने का अर्थ प्रकट कर रहा हो तो वहाँ अ प्रत्यय मानना चाहिए जैसे –

मानव – मनु + अ
राघव – रघु + अ
दानव – दनु + अ

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